संवाद न्यूज एजेंसी
हिसार। रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए हमले के चौथे दिन वहां पर फंसे भारतीय दहशत में है। उनके हॉस्टलों के बाहर बमबारी हो रही है। यूक्रेन सरकार के रूसी सैनिकों को देखते ही गोली मारने के आदेश के बाद विद्यार्थी दशहत में है। उन्हें दिन-रात फाइटर जेट और गोलियों की आवाजें सुनाई दे रही हैं। खारकीव में फंसे विद्यार्थियों को अब एक समय खाना मिल रहा है। नेटवर्क कमजोर होने से विद्यार्थियों का अपनों से संपर्क टूट चुका है। वहीं परिजनों का कहना है कि प्रशासन की ओर से जारी हेल्पलाइन नंबर गलत मिल रहे हैं या फिर कोई फोन नहीं उठा रहा। यूक्रेन से जो विद्यार्थी मशक्कत झेल वतन लौट रहे हैं, उनसे तीन गुना किराया वसूला जा रहा है।
जिला नागरिक अस्पताल परिसर निवासी अंशुमन ने बताया कि वह खारकीव के एक हॉस्टल में फंसा हुआ है। यहां पर काफी तादाद में विद्यार्थी हैं। पहले हॉस्टल से कुछ दूरी पर बमबारी व फायरिंग हो रही थी। अब तो हॉस्टल के पास ही बमबारी हो रही है। फाइटर जेट लगातार छतों के ऊपर से गुजर रहे हैं। आवाजें सोने नहीं दे रही है। कुछ देर पहले की हॉस्टल के पीछे बमबारी हुई है। आज दिन में सिर्फ एक बार खाना मिला है। बस दो दिन का राशन बचा हुआ है। भारतीय दूतावास से बात करते हैं तो यही कहा जा रहा है कि वे बात कर रहे हैं। अभी तक ये पता नहीं चल पा रहा कि यहां से कब निकलना है। खारकीव और कीव में फंसे कुछ युवा तो घर लौटने की आशा ही छोड़ चुके हैं।
बेटी से संपर्क टूटा, परिजनों का बुरा हाल
जिला नागरिक अस्पताल में स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत मीनाक्षी ने बताया कि उनकी बेटी कीव में है। फिलहाल वह हॉस्टल की बेसमेंट में है। शनिवार रात को बेटी से बातचीत हुई थी। उसके बाद उसका मोबाइल नंबर नहीं मिल रहा है। प्रशासन ने जो नंबर दिए थे उन पर बात की तो कुछ ने कहा कि ये नंबर गलत है और कुछ ने फोन नहीं उठाया। रातभर फोन मिलाते रहे, लेकिन बात नहीं हुई। सुबह फिर से बेटी खुशी का नंबर मिलने का प्रयास किया लेकिन देर शाम तक कोई बात नहीं हुई। इस बारे में यहां के प्रशासन से बात की तो उन्होंने कहा कि वे अधिकारियों के संपर्क में है।
दो दिन दहशत में बिताए, अब खुश हूं पर चिंता है हमारे हजारों साथी फंसे हैं
शहर के साथ लगते गांव शिकारपुर की रहने वाली ईशा दो दिन के सफर के बाद हिसार लौट आई है। ईशा ने बताया कि वह यूूक्रेन के इवानो शहर में थी। वहां पर दो दिन दशहत में बीते। चारों तरफ बमबारी हो रही थी। मिसाइलें दागी जा रही थी। हर तरफ धमाकों की आवाजें और चीखें सुनाई दे रही थीं। हमें पता है किस तरह हमने वहां पर खौफ के दो दिन गुजारे। हर वक्त यहीं ख्याल आ रहा था कि कब घर पहुंचेंगे। मैं खुश हूं कि घर आ गई, लेकिन हमारे हजारों साथी अभी भी वहीं फंसे हैं, मुझे उनकी चिंता हो रही है।
कर्फ्यू में रात के समय निकले
ईशा ने बताया कि दो दिन पहले रात करीब दस बजे बंकर से बाहर निकले। वहां पर कर्फ्यू लगा हुआ था। हमने रोमानिया पहुंचने के लिए मिनी बस की। बस के आगे भारतीय तिरंगा लगा हुआ था। रास्ते में दो-तीन जगह जांच हुई। हमारे पासपोर्ट देखे गए, लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा। रात करीब ढाई बजे रोमानिया पहुंचे। यहां पहुंचने के बाद एयरपोर्ट पर जाने के लिए लाइन में लगे। पूरा दिन लाइन में खड़े रहे, उसके बाद एयरपोर्ट तक जाने की अनुमति मिली। रोमानिया बॉर्डर पर हजारों की संख्या में भारतीय फंसे हैं। ईशा ने बताया कि आज सुबह करीब साढ़े आठ बजे वहां से हवाई जहाज में बैठे। शाम करीब साढ़े छह बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे। हम खुश है कि सही सलामत अपने देश लौट आए।
पाबड़ा के अमन ने 72 हजार में करवाई थी टिकट बुक, रिफंड नहीं हुए रुपये
पाबड़ा गांव निवासी अमन कुमार खारकीव शहर में फंसा हुुआ है। देश लौटने के लिए अमन ने 72 हजार रुपये देकर टिकट बुक करवाई थी। जो कि सामान्य दिनों में 20 से 25 हजार में बुक होती थी। युद्ध के कारण फ्लाइट रद्द हो गई। अभी तक टिकट के रुपये रिफंड नहीं हुए हैं। अमन ने बताया कि हमारे हॉस्टल के चारों ओर रूसी सेना घूम रही है। हर दो-तीन मिनट में बम के धमाकों की आवाज सुनाई दे रही है। हम बंकर में छुपे हुए हैं। कमरों की लाइट जगाने की भी अनुमति नहीं है। वहीं नया गांव निवासी नया गांव का कुलदीप 24 फरवरी को हिसार आ गया था। कुलदीप ने 60 हजार रुपये में टिकट बुक करवाई थी। कुलदीप ने बताया कि सामान्य दिनों में यह टिकट करीब 20 हजार रुपये में बुक हो जाती थी।
रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचा अमरदीप
शहर के कैमरी रोड स्थित पालिका विहार निवासी अमरदीप रोमानिया बॉर्डर पर पहुंच गया है। अमरदीप के पिता सत्यवान ने बताया कि बस चालक ने उन्होने रोमानिया बॉर्डर से तीन किलोमीटर दूर उतार दिया है। अब वे पैदल चलकर बॉर्डर की ओर जा रहे हैं। रास्ते में उन्हें टैंक आदि जाते दिख रहे हैं।
रोमानिया में नहीं होने दिया जा रहा प्रवेश
यूक्रेन के ओडेसा से चलकर रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचे भारत के 50 छात्रों को रोमानिया मे प्रवेश करने नहीं दिया जा रहा है। इन छात्रों को वहीं पर ही रोक दिया है। इन छात्रों में हिसार का एक छात्र अमरदीप शामिल है। अमरदीप ने बताया कि भारतीय दूतावास के कहने पर वे ओडेसा से किराये पर बस करके रोमानिया बॉर्डर पर गए थे, लेकिन अब प्रवेश नहीं होने दिया जा रहा है।
खारकीव में पानी सप्लाई बंद
खारकीव में फसे हिसार के सागर ने बताया कि रविवार दोपहर बाद पूरे खारकीव शहर की पानी सप्लाई बंद कर दी है। अगर पानी सप्लाई शुरू नहीं हुई तो हालात और भी खतरनाक हो जाएंगे। हॉस्टल में पानी की पहले ही कमी चल रही है। खाने पीने का राशन भी खत्म हो रहा है। ऐसे में पानी पीकर बिस्कुट व सूखे चावल खाकर गुजारा किया जा रहा था। अब वो भी खत्म होने वाला है।
पूरी रात फ्लाइट मोड में लगवाए मोबाइल
खारकीव में फंसे बरवाला वार्ड नंबर एक निवासी सागर ने बताया कि शनिवार रात उनके मोबाइल फ्लाइट मोड में लगवा दिए। पूरी रात उनका मोबाइल नंबर बंद रहा। सुबह जब फ्लाइट मोड हटाया तो मोबाइल की लोकेशन ऑफ करवा दी। सागर ने बताया कि रविवार को उनके हॉस्टल के कुछ ही दूरी पर कई बम विस्फोट हुए, जिसके कारण उनके हॉस्टल की सभी लाइटें बंद करवा दी।
हिसार। खारकीव के एक हॉस्टल की बेसमेंट में बैठे विद्यार्थी।- फोटो : Hisar
यूक्रेन के खारकीव शहर में अपने हॉस्टल के बंकर में बैठा पाबड़ा का अमन व उसका दोस्त। अमन के सौंजन्य ?- फोटो : Hisar