हिसार। अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा में पदाधिकारियों के बीच चल रहे विवाद पर बड़ा फैसला आया है। सोसायटीज के सहायक रजिस्ट्रार मुरादाबाद ने भाजपा नेता एवं पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई को महासभा के संरक्षक पद से हटाने और बिश्नोई रत्न सम्मान वापस लेने के फैसले को खारिज कर दिया है। साथ ही, महासभा की कार्यकारिणी बदलने और अन्य सभी फैसलों पर भी रोक लगा दी है।
देवेंद्र बूड़िया का कहना है कि यह आदेश फर्जी है और ऐसा कोई आदेश ही जारी नहीं हुआ। रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया कि महासभा के संविधान के अनुसार, प्रधान को हटाने का अधिकार संरक्षक के पास है, न की प्रधान के पास। उन्होंने कहा कि यदि प्रधान सही कार्य नहीं कर रहा हो तो संरक्षक उसे हटा सकता है। इस आधार पर पूर्व प्रधान देवेंद्र बूड़िया ने संरक्षक कुलदीप बिश्नोई को हटाने का निर्णय असंवैधानिक करार दिया है।
रजिस्ट्रार ने कहा है कि देवेंद्र बूड़िया ने मुकाम धाम में महासभा से जुड़े निर्णयों को नए रजिस्टर के बजाय पुराने रजिस्टर में दर्ज करना चाहिए था। इसके अलावा कार्यकारिणी सदस्यों को विश्वास में लिए बिना लिए गए निर्णय भी महासभा के संविधान के खिलाफ थे।
कुलदीप बिश्नोई बोले - यह फैसला समाज के हित में
इस फैसले के बाद कुलदीप बिश्नोई ने वीडियो संदेश जारी कर नई कार्यकारिणी व प्रधान को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सच्चाई की जीत हुई है और यह फैसला समाज के हित में है। वहीं, देवेंद्र बूड़िया ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर आदेश को फर्जी बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने रजिस्ट्रार दफ्तर से बात की है, जहां से ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ। महासभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुभाष देहड़ू ने भी फैसले पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महासभा कार्यकारिणी के सदस्यों ने सहायक रजिस्ट्रार से अपील की थी ताकि संगठन में हो रही अलोकतांत्रिक गतिविधियों की जांच हो सके। लंबी सुनवाई के बाद यह फैसला आया है, जिससे सच्चाई सामने आई है।