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सरकार के खिलाफ रामपाल युद्ध मामला: डीएसपी व आईपीएस सहित कुछ गवाहों के बयान फाइल में नहीं मिले

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हिसार। सतलोक आश्रम प्रकरण में स्वयंभू संत रामपाल सहित 981 पर देशद्रोह, हत्या के प्रयास सहित कई आरोपों में दर्ज मामले की अदालत फाइल में डीएसपी व आईपीएस अधिकारी सहित कुछ गवाहों के बयान नहीं मिले। इसके लिए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय तेवतिया की अदालत ने मामले के जांच अधिकारी अनिल कुमार को 16 मई को तलब किया है। वहीं मामले के एक गवाह पुलिस कांस्टेबल रमेश की गवाही देने से पूर्व ही मौत हो चुकी है, जिसकी मृत्यु रिपोर्ट भी अदालत ने तलब की है। इस मामले में अब तक अभियोजन पक्ष के कुल 80 गवाहों की गवाही हो चुकी है जिसमें पुलिस एएसआई नरेश कुमार की 80वें गवाह के तौर पर गवाही हुई। इस मामले में कुल 406 व्यक्तियों की गवाही होनी है।
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देशद्रोह मामले में आरोपी रामपाल व मनोज को जमानत नहीं मिली है और दोनों जेल नंबर 2 में बंद हैं। मामले के पांच आरोपी बबीता, सावित्री, प्रीतम उर्फ राज कपूर, रामफल, राजेंद्र को अन्य आरोपियों की तरह जमानत तो मिली हुई है लेकिन वे अन्य मामले में जेल में हैं। इस कारण इन आरोपियों की वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशी होती है।
युवक की हत्या के मामले में होनी थी सुनवाई
मामले के अनुसार करीब 15 साल पहले रोहतक के करौंधा आश्रम के समर्थकों व आर्य समाजियों के बीच हुए खूनी संघर्ष में मारे गए युवक की हत्या के आरोप में रोहतक अदालत में 14 जुलाई 2014 को सुनवाई थी। मामले की सुनवाई हिसार की अदालत से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से होनी थी। इस दिन रामपाल के समर्थकों ने हिसार अदालत परिसर में जमकर उत्पात मचाया था। इन्होंने न सिर्फ अदालत परिसर को घेर लिया बल्कि अदालत का एक शीशा भी तोड़ दिया और वकीलों के साथ भी मारपीट की थी।
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दो बाद जारी हुए गैर जमानती वारंट
इस पर जिला बार एसोसिएशन ने अनिश्चितकालीन हड़ताल करते हुए हाईकोर्ट में अदालत की अवमानना की याचिका दायर कर दी। इसी याचिका पर रामपाल दो बार अदालत में पेश नहीं हुआ तो उनके 10 नवंबर के लिए और बाद में 17 नवंबर 2014 के लिए दो बार गैर जमानती वारंट जारी किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी इन आदेशों पर स्थगन आदेश नहीं दिया। इस बार हाईकोर्ट ने प्रदेश के गृह सचिव व पुलिस महानिदेशक को कड़ी फटकार भी लगाई है। 17 नवंबर को भी पुलिस रामपाल को गिरफ्तार नहीं कर पाई तो हाईकोर्ट 20 नवंबर तक का समय दिया। 18 नवंबर को पुलिस के आंसू गैस व पानी की बौछार के बदले रामपाल के कमांडो ने पुलिस पर पेट्रोल बम फेंके और गोलियां चलाईं। पुलिस ने देशद्रोह समेत अन्य धाराओं में मामले दर्ज किया था।
11 आरोपियों की हो चुकी है मौत
इस मामले में 11 आरोपियों की मौत हो चुकी है। आरोपी अनिल की 7 दिसंबर 2015 को, संजीव की 2016 में, अरविंद, सीताराम, नेहरू व रामसिया प्रसाद की वर्ष 2019 में, विजय, नरसा उर्फ नासी, ओम प्रकाश, धर्मेंद्र की वर्ष 2021 में और विनोद की वर्ष 2017 को मृत्यु हो गई।
30 आरोपियों के खिलाफ अलग सुनवाई, 12 भगोड़े
मामले के 30 आरोपियों के खिलाफ अलग से सुनवाई चल रही है जिनमें से 12 भगोड़े घोषित हैं। बाकी 18 आरोपियों में अमन, अमित केसरी, मोहन, राधेश्याम, राम लाल उर्फ सोहन, राना राम, रिंकू, संदीप, सतेंद्र, विनोद, आशिक, गोपाल, ईशर राम, विपिन, राजेंद्र उर्फ गजेंद्र, लोकेंद्र, प्रवीण, रामधन शामिल हैं जिनको जमानत मिली हुई है। जो 12 आरोपी भगोड़े घोषित किए हैं, उनमें अजय को 11 जुलाई 2016 को, बबलू चौधरी, राधेश्याम को 5 सितंबर 2016 को, सुरेश, राहुल सिंह को 17 अक्टूबर 2016 को, कोशल वर्मा, दरेहर दास, शिव चरण, योगेश को 26 फरवरी 2018 को, महेंद्र व रघुनाथ को 15 दिसंबर 2018 को भगोड़ा घोषित किया था। इसी प्रकार अदालत ने आरोपी शिव पूजन भी भगोड़ा घोषित किया हुआ है।
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