फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

केस खारिज करने वाले एसएचओ के मसले पर तीन हफ्ते में लें फैसला

Fri, 31 Mar 2017 12:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/हिसार
विज्ञापन
विज्ञापन
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक याचिका के आधार पर यहां के एसपी को आदेश दिया है कि आदमपुर थाना के तत्कालीन प्रभारी दलबीर सिंह के खिलाफ शिकायत पर तीन हफ्ते में फैसला लें। दलबीर सिंह ने एसएचओ रहते पूर्व एसपी रामसिंह वगैरह के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर दर्ज धोखाधड़ी का केस खारिज कर दिया था। शिकायतकर्ता ने दलबीर सिंह के खिलाफ आरोपियों से साज-बाज होकर केस खारिज करने संबंधी शिकायत एसपी को दी थी, मगर कार्रवाई नहीं हुई थी।
विज्ञापन


आदमपुर निवासी देवीलाल बिश्नोई ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उन्होंने पूर्व एसपी रामसिंह बिश्नोई समेत पांच लोगों के खिलाफ आदमपुर थाना में 10 मई 2011 को कोर्ट के माध्यम से धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया था। तत्कालीन डीएसपी ओमबीर सिंह ने मामले की जांच की थी और उन्होंने कोर्ट में बयान दर्ज करा दिए। याचिका में कहा गया कि जांच अधिकारी दलबीर सिंह ने अपने उच्चाधिकारी की रिपोर्ट को दरकिनार कर केस खारिज कर दिया था। शिकायतकर्ता ने कहा कि मामले से संबंधित एक सीडी इस्तगासे में दी थी। दलबीर सिंह ने सीडी का अवलोकन नहीं किया और केस खारिज कर दिया।

न्यायिक दंडाधिकारी ने सीडी का अवलोकन कर 27 जनवरी 2015 को पूर्व एसपी रामसिंह बिश्नोई को आपराधिक षडयंत्र रचने की धारा के तहत समन जारी किया था। उसने शिकायत में कहा कि दलबीर सिंह ने रिपोर्ट में एक हैंडराइटिंग एक्सपर्ट का हवाला देकर कहा था कि इकरारनामे पर लगाया अंगूठा मेरे पिता कुंभाराम का हो सकता है। जबकि मधुबन से आई रिपोर्ट में अंगूठा उसके पिता का नहीं होना बताया गया। प्राइवेट हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट का हवाला देकर मुकदमा खारिज कर दिया गया। डीएसपी ने बयान देकर कहा था उन्होंने अंगूठा कुंभाराम का नहीं होना बताया है। दलबीर सिंह ने आरोपियों से साज-बाज होकर उनको अनुचित लाभ पहुंचाया है और मुझे हानि पहुंचाते हुए केस खारिज कर दिया। दलबीर सिंह सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
विज्ञापन


यह है मामला
आदमपुर के देवीलाल के अनुसार उनके पिता कुंभाराम के नाम खारा बरवाला के पास 73 कनाल 3 मरला जमीन थी। उनके पिता की 11 जनवरी 2007 को मौत हो चुकी है। उन्होंने मरने से पहले जमीन मेरे व मेरे भाई बनवारी लाल के नाम करा दी थी। देवीलाल ने बताया कि मंगतूराम और कर्मबीर ने उसके व उसके पिता के वारिसों पर एक दावा कोर्ट में दायर किया था। उन दोनों का आरोप था कि कुंभाराम ने वह जमीन 10 नवंबर 2005 को उनको बेचने का इकरारनामा किया था। देवीलाल ने याचिका में कहा था कि इकरारनामे पर उसके पिता के अंगूठे के निशान फर्जी हैं और कब्जा भी हमारा है। देवीलाल ने याचिका में कहा था कि सारा षडयंत्र सेवानिवृत्त एसपी रामसिंह का है।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें