सिविल अस्पताल में खुले में फेंका गया मेडिकल। संवाद
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हिसार। कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के खतरे को भांपते हुए जिला प्रशासन पूरी सख्ती दिखा रहा है। जहां एक ओर पुलिस ने शहर में बिना मास्क वालों के चालान काटने शुरू कर दिए हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग लापरवाही बरत रहा है। सिविल अस्पताल परिसर में पीपीई किट खुले में फेंकी जा रही हैं। पीपीई किट के साथ अस्पताल स्टाफ द्वारा प्रयोग किए गए ग्लब्ज, मास्क व अन्य सामान भी खुले में फेंका जा रहा है। अस्पताल में जनरेट होने वाला मेडिकल इस प्रकार खुले में फेंक कर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा एनजीटी के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। निगम की ओर से नोटिस देने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग अपने कचरे का प्रबंधन नहीं कर रहा है।
नगर निगम के नियमानुसार 50 किलोग्राम से ज्यादा कचरा जनरेट करने वाले संस्थानों को खुद के स्तर पर ही अपने कचरे का प्रबंधन करना होता है। कचरा प्रबंधन के लिए नगर निगम द्वारा सिविल अस्पताल को नोटिस भी भेजे जा चुके हैं। नगर निगम की सफाई शाखा के अधिकारियों ने बताया कि सिविल अस्पताल में 50 किलोग्राम कचरा एकत्रित करने वाली कैटेगरी में शामिल है। इसलिए सिविल अस्पताल को अपना कचरे का स्वयं प्रबंधन करना होता है।
हैंड सैनिटाइजर मशीन पड़ी हैं खराब
सिविल अस्पताल की सीएमओ डॉ. रत्ना भारती के कार्यालय के बाहर लगी स्वयंसंचालित हैंड सैनिटाइजर मशीन खराब पड़ी है। वहीं अस्पताल के सभी वार्डों के बाहर भी सैनिटाइजर की व्यवस्था नहीं है। गौरतलब है शहर की सरकारी यानी मेयर व सभी पार्षदों द्वारा हाउस की बैठक में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली द्वारा निंदा प्रस्ताव पारित कर दिया गया था। इसके बाद भी अस्पताल की कार्य प्रणाली में ज्यादा सुधार नजर नहीं आ रहा है।
इस बारे में संबंधित डॉक्टर व कर्मचारियों से बातचीत करूंगी। इस प्रकार पीपीई किट फेंकना सही नहीं। वहीं ओमिक्रॉन की रोकथाम के लिए डॉक्टरों की टीम निरंतर प्रयासरत है। वैक्सीनेशन के लिए जागरूक किया जा रहा है। - डॉ. रत्ना भारती, सीएमओ, सिविल अस्पताल हिसार
सिविल अस्पताल में खुले में फैंकी गई पीपीई किट। संवाद- फोटो : Hisar