कहते है कि अगर इंसान में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो रास्ते में आने वाली कठिनाइयां भी कदमों को रोक नहीं पाती। ऐसी ही कठिनाइयों से पार होकर हिसार के रायपुर ढाणी निवासी अजय सैनी ने कराटे खेल में खिलाड़ी से कोच तक का सफर तय किया है। सैनी अब कोच बनकर करीब 200 खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर खेल की बुलंदियों तक पहुंचा रहे हैं।
प्रशिक्षण देने आए खिलाड़ियों को देख हुए प्रेरित
रायपुर ढाणी के रहने वाले अजय स्कूल में कराटे का प्रशिक्षण देने के लिए आए खिलाड़ियों को देेख इस खेल से प्रेरित हुए। कराटे करते खिलाड़ियों को देख अजय के मन भी इस खेल को सीखने की ललक जगी और वह कराटे का प्रशिक्षण लेने के लिए हिसार आकर रहने लगे। हिसार आकर वर्ष 2006 में कराटे कोच हरीश सिराधना से कोचिंग लेना आरंभ किया।
खिलाड़ी के तौर पर जीते काफी पदक
अजय ने कराटे का प्रशिक्षण लेते हुए विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर काफी पदक हासिल किए। प्रशिक्षण लेने के एक साल के अंदर ही उन्होंने कराटे की फर्स्ट डेन ब्लैक बेल्ट हासिल की। यह बेल्ट कोलकाता में ऑल इंडिया कराटे प्रतियोगिता में भाग लेते हुए हासिल की। वहीं वर्ष 2008 में इंटरनेशनल कराटे प्रतियोगिता में बेल्ट अपग्रेड की परीक्षा में गोल्ड मेडल हासिल किया। इन पदकों के अलावा राष्ट्रीय स्तर पर बहुत सी प्रतियोगिताओं में भाग लेते हुए काफी पदक हासिल किए।
चोट की वजह से बने कोच
अजय को खिलाड़ी का सफर चोट लगने की वजह से बीच में ही छोड़ना पड़ा। अजय को 2012 में अभ्यास के समय घुटने में चोट आई, जिसके कारण उन्हें अपना खेल का सफर बीच में ही छोड़ना पड़ा। लेकिन अजय ने हार नहीं मानी और खेल से जुड़े रहने का निर्णय किया। चोट से उबरने के बाद खुद खेलने की बजाय खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने की ठानी।
प्रशिक्षणार्थी भी चमके
खिलाड़ी से कोच बने अजय सैनी ने वर्ष 2013 में हांसी में हिसार की कराटे एकेडमी की शाखा का हांसी में आरंभ की। तीन साल के कोच के सफर में उनसे प्रशिक्षण पाने वाले योगेश, दयानंद, नरेश, पूजा, प्रीति, पार्वती, यश, सुमित, सागर आदि खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी पदक हासिल किए हैं।