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हांसी किले के शिखर पर पांच एकड़ में बनेगा पार्क

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हांसी। पुरातत्व विभाग की ओर से हांसी के किले के शिखर पर हरा-भरा पार्क बनाया जाएगा। यह पार्क पांच एकड़ जमीन में विकसित किया जाएगा। इस पार्क का निर्माण करने के लिए विभाग द्वारा पैमाइश व एस्टिमेट का कार्य पूरा कर लिया गया है। साथ ही पुरातत्व विभाग की टीम ने ड्रोन से भी फोटोग्राफी करवाई थी। इसके लिए पिछले वर्ष 20 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। मगर कोरोना की वजह से योजना पर काम शुरू नहीं हो पाया है। पुरातत्व विभाग की मंशा है कि जल्द ही इस कार्य को मूर्तरूप प्रदान किया जाए।
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पार्क का निर्माण करने से पहले पानी के प्रबंध के लिए यहां एक ट्यूबवेल लगाया जाएगा। पृथ्वीराज चौहान के नाम से विख्यात इस किले के शिखर पर पार्क बनने से किले का महत्व और बढ़ जाएगा। जिस वजह से यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा। देखरेख के अभाव में फिलहाल यह किला खंडहर हालत में है। किले के शिखर पर मैदान में दूर दूर तक कंकर पड़े हैं। किले की चढ़ाई अधिक होने की वजह से शिखर तक पहुंचते-पहुंचते सैलानी थक जाते हैं। अभी वहां पर पर्यटकों के लिए पेयजल की व्यवस्था तक नहीं है।
पर्यटकों के लिए पार्किंग की होगी व्यवस्था
किले में आने वाले पर्यटकों को अपने वाहन नीचे गलियों में खड़े करने पड़ते हैं, लेकिन जिस तरह से विभाग की तैयारियां चल रही हैं। उससे लगता है कि जल्द ही यहां पर पर्यटकों के लिए पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी। पर्यटन के विकास को प्रभावित करने वाले कई कारक होते हैं। इनमें मौसम, दर्शनीय आकर्षण, सरल उपयोग, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आकर्षण, आराम और मनोरंजन, स्वास्थ्यवर्धक व रोमांच शामिल हैं। शहर से करीब 52 फुट ऊंचाई पर स्थित इस किले पर आधुनिक पार्क बनाया जाएगा।
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किले का इतिहास
यह किला 12वीं सदी के प्रसिद्ध राजपूत योद्धा पृथ्वीराज चौहान द्वारा बनाया गया था। इसे जॉर्ज थॉमस ने 1798 में दोबारा बनवाया, जब उसने हांसी को अपनी रियासत की राजधानी बनाया, जिसमें हिसार और रोहतक शामिल थे। जॉर्ज थॉमस को परास्त करने के बाद ब्रिटिश सेना ने इस किले को छावनी में तब्दील कर दिया था। हालांकि सन 1857 के विद्रोह के दौरान ब्रिटिश ने इसे छोड़ दिया था। चौकोर आकार का यह किला 30 एकड़ में फैला है, जो 52 फुट ऊंची और 37 फुट मोटी दीवार से घिरा है। यह प्राचीन भारत के सबसे मजबूत किलों में से एक था। पृथ्वीराज चौहान की हार के बाद इसमें एक मस्जिद बनवाई गई थी। किले के दरवाजे को अच्छी तरह से पक्षियों और जानवरों व हिंदू देवी-देवताओं की सुंदर छवि के साथ नक्काशी की गई है। बाद में फिरोज शाह तुगलक ने रणनीतिक कारणों की वजह से हिसार को हांसी से जोड़ने वाली एक सुरंग का निर्माण कराया था। किले में भगवान बुद्ध और भगवान महावीर की मूर्तियां भी हैं। अष्टधातु से बनी 57 जैन मूर्तियों 1982 की खुदाई के दौरान बरामद हुई थी। इस किले को 1937 में भारतीय पुरातत्व विभाग ने राष्ट्रीय महत्व का एक संरक्षित स्मारक घोषित किया था।
किले को सुंदर बनाना हमारी सरकार की प्राथमिकता हैं और पुरातत्व विभाग ने इसे सुंदर व मॉडल बनाने के लिए लगातार टीमें आ रही हैं। कोरोना काल की वजह से इसका स्वरूप बदलने में कुछ परेशानी आई थी। मगर अब जल्द इसके विकास के लिए ग्रांट आ जाएगी और इसे सुंदर रूप दिया जाएगा। वह मुख्यमंत्री से मुलाकात कर जल्द किले का विकास शुरू कराने का प्रयास करेंगे।
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- विनोद भयाना, विधायक, हांसी
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