पेरिस ओलंपिक में हिसार की कुश्ती खिलाड़ी अंतिम पंघाल के साथ हुए घटनाक्रम को लेकर पिता रामनिवास ने कहा कि उनकी अंतिम से बात हुई है। उसकी कोई गलती नहीं थी। उन्होंने कहा कि अंतिम ने पूरी घटना के बारे में वीडियो जारी कर सफाई दी है। अमर उजाला से बातचीत में अंतिम पंघाल के पिता ने बताया कि उनकी बेटी परमिशन लेकर खेल गांव से बाहर होटल में आ गई थी, जहां उसकी फिजियो, कोच और छोटी बहन रह रही थी।
अंतिम की तबीयत खराब होने के कारण उसने अपनी बहन निशा को कहा कि मेरा कार्ड ले जा और खेल गांव से सामान ले आओ। जब निशा खेल गांव पहुंची तो उसे गेट पर ही रोक लिया गया। उसे मान्यता कार्ड की वेरिफिकेशन के लिए पुलिस थाने ले जाया गया। उसको गिरफ्तार कर लेने जैसी कोई बात नहीं थी। वेरिफिकेशन के लिए ही ले जाया गया था। यह काम होने के बाद निशा को होटल भेज दिया था। मेरी अंतिम के कोच से भी बात हुई थी।
रामनिवास ने बताया कि उनकी बेटी ने होटल जाने लिए कैब की थी। कैब चालक ने 13 यूरो मांगे, लेकिन उसके पास सात ही यूरो थे। कोच और उसने कहा कि आप थोड़ी देर रुको होटल से आपको 6 यूरो और लाकर देते हैं। इतनी देर में पुलिस आ गई। कैब चालक ने अपने बचाव के लिए पुलिस को बताया कि ये किराया नहीं दे रहे हैं और नशा कर रखा है। कैब चालक ने अपनी भाषा पुलिस को बताया, जिसे अंतिम के कोच को समझने में कठिनाई हुई। भाषा समझ में नहीं आने के कारण यह विवाद हुआ।
अंतिम पंघाल के पिता ने बताया कि बेटी निशा फेडरेशन के खर्चे पर पेरिस नहीं गई थी। अंतिम के साथ एक फिजियो व दो कोच जाने थे। मुझे 15 दिन पहले पता चला कि अपना तो कोई नाम ही नहीं है। फिर मैं पीटी उषा से मिला, उन्होंने मेरी बात सुनी। मैंने कहा कि 5 दिन पहले जाएंगे तो साथ में कोई पार्टनर भेजो। उन्होंने कहा, एक लेटर निकलवा दो, ताकि उनके साथ किसी को भेजा जा सके। उस लेटर के जरिए वीजा लग जाएगा। इस पर उन्होंने साई के जरिए पत्र बनाया, जिसमें उल्लेख था कि जो खर्चा होगा वह साई देगा, लेकिन बाद में साई वालों ने कहा, एक बार तुम टिकट बनवा दो, पैसे बाद में हम दे देंगे।