शहर को बर्ड फ्लू से बचाने के लिए वेटरनरी डॉक्टर्स की टीम ने शुक्रवार को देर शाम तक 812 पक्षियों को मार कर जमीन में दफनाया। बर्ड फ्लू की रिपोर्ट मिलते ही आधी रात को पशुपालन विभाग ने नोटिफिकेशन जारी किया। सुबह छह बजे इस एक्ट के अनुसार ऑपरेशन शुरू किया गया।
बृहस्पतिवार को ब्लू बर्ड झील के बतखों में बर्ड फ्लू की रिपोर्ट मिलते ही विभाग ने प्रदेश भर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया था। आधी रात को पशुपालन विभाग एवं डेयरी विभाग के उप सचिव विनित महाजन ने अधिसूचना जारी की। जिसमें ब्लू बर्ड पर्यटन केंद्र को एवियन इन्फ्लूएंजा एच5एन8 प्रभावित घोषित किया गया। इस क्षेत्र के एक किलोमीटर को प्रभावी क्षेत्र घोषित किया गया। एक्ट के अनुसार दस किलोमीटर के दायरे को एवियन इन्फलूएंजा निरीक्षण क्षेत्र डिक्लेयर किया। जिसमें इस एरिया से कोई भी पक्षी, अंडा, मांस बाहर नहीं भेजा जाएगा।
68 चिकित्सकों को बुलाया
अधिसूचना के अनुसार कार्यवाही करते हुए पशुपालन विभाग के 68 चिकित्सकों को बुलाया गया। इसके अलावा लुवास के साइंटिस्ट सहित अन्य विभागों के कर्मचारियों को इस काम के लिए नियुक्त किया गया। बर्ड फ्लू ऑपरेशन के लिए अलग-अलग विभागों के करीब 260 लोगों को लगाया गया। सुबह छह बजे सभी टीम धांसू रोड स्थित वेटरनरी टीका संस्थान में पहुंची। यहां पहले सभी को नाश्ता कराया गया। इसके बाद सभी को टैमी फ्लू की गोली दी गई। करीब 11 बजे चिकित्सक पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट सूट पहनकर झील पर पहुंचे।
झील में 156 पक्षी मारे....
झील पर करीब 11 बजे से पक्षियों को पकड़ने का काम शुरू किया गया। वन विभाग की ओर से लाया गया जाल डालकर परिंदों को पकड़ लिया गया। एक-एक पक्षी की गर्दन मरोड़ कर उन्हें मारा गया। पानी में तैर रहे पक्षियों को पकड़ने के लिए बोट का प्रयोग किया गया। झील में रहने वाले करीब 156 पक्षियों को शाम चार बजे तक खत्म कर दिया गया। इसके बाद इन सभी पक्षियों बोरियों में भरा गया। बोरियों को दो मीटर गहरे, दो मीटर लंबे, दो मीटर चौडे़ गड्ढों में दबाया गया। पक्षियों पर दबाने से पहले गड्ढों में चूना भी डाला गया था।
हैचरी में 595 मुर्गे मारकर दफनाए
चिकित्सकों की टीम ब्लू बर्ड झील के करीब एक किलोमीटर दायरे में राजकीय हैचरी फार्म पहुंची। सिरसा बाईपास पर पुलिस चौकी के पास स्थित इस हैचरी फार्म में 595 मुर्गे- मुर्गी थे। इन सभी को मारने के बाद यहां हैचरी में ही गहरे गड्ढों में दफनाया गया। मुर्गों की संख्या अधिक होने के कारण यहां गड्ढे खोदने के लिए जेसीबी लगा गई गई। इसके अलावा यहां ट्रैक्टर भी लगाए गए थे। हैचरी के अंडों को भी तोड़कर दफनाया गया। प्रदेश सरकार के इस हैचरी फार्म में चूजे तैयार किए जाते हैं। जो मुर्गी पालन करने वाले किसानों को उपलब्ध कराए जाते हैं।
बैक यार्ड पोल्ट्री फार्म में 60 मारे
बैक यार्ड पोल्ट्री फार्म यानी घरों में रखे जाने वाले मुर्गे-मुर्गी भी इस ऑपरेशन में मारे गए। झील के एक किलोमीटर के दायरे में आने वाली अंबेडकर बस्ती में कुछ लोगों ने मुर्गे रखे हुए थे। पशुपालन विभाग की टीम ने बृहस्पतिवार को सर्वे कर इनकी रिपोर्ट तैयार की थी। शुक्रवार देर शाम इन मुर्गों को मार दिया गया।
सेंट्रल व स्टेट टीम की निगरानी में हुआ काम
भोपाल की हाई सिक्योरटी एनिमल डिसीज लैबोरेट्री से आए एक्सपर्ट की निगरानी में यह अभियान चलाया गया। चंडीगढ़ से डिप्टी डायरेक्टर राममेहर मोर, डिप्टी डायरेक्टर सुखदेव राठी सहित अन्य अधिकारी सुबह से ही मौके पर पहुंच गए थे। पशुपालन विभाग के महानिदेशक डॉ. जीएस जाखड़ लगातार रिपोर्ट लेते रहे। मुख्यालय को रात 8 बजे आपरेशन कंप्लीट होने का एलान किया गया।
मोबाइल से बनाई वीडियो
वेटरनरी चिकित्सकों ने इस पूरे घटनाक्रम की मोबाइल में विडियो भी बनाई है। इसके अलावा फोटोग्राफी भी हुई है। विभाग की ओर से इस पूरे ऑपरेशन की सीडी तैयार कर प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।
रविवार को खुल जाएगा पर्यटन केंद्र और पेट्रोल पंप
चिकित्सकों के अनुसार बर्ड फ्लू के संभावित सभी पक्षियों को मार दिया गया है। इसके बाद शनिवार को यहां सेनीटाइजेशन प्रोग्राम चलाया जाएगा। माना जा रहा है कि रविवार को ब्लू बर्ड पर्यटन केंद्र को फिर से खोल दिया जाएगा। पेट्रोल पंप को भी दोबारा से चालू किया जाएगा।
अगले पांच दिन टैमी फ्लू लेंगे चिकित्सक
इस ऑपरेशन में काम करने वाले सभी चिकित्सकों के सूट लेकर उन्हें जलाया गया है। इसके बाद सभी चिकित्सकों को दोबारा से टैमी फ्लू दी गई। वे अगले पांच दिन तक लगातार टैमी फ्लू का सेवन करेंगे। अगर किसी भी चिकित्सक को बर्ड फ्लू के लक्षण मिले तो उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कर उपचार शुरू कराया जाएगा।
आज चलेगा सेनीटाइजेशन प्रोग्राम
शनिवार को ब्लू बर्ड झील एरिया में सेनीटाइजेशन प्रोग्राम चलाया जाएगा। जिसमें यहां दवाइयां डाली जाएंगी। झील के किनारों पर चूना डाला जाएगा। चूना बेहद गर्म होता है। जो वायरस को मारने में सक्षम होता है। ऐसे में झील के किनारे पर चूना डालने से यह एरिया काफी हद तक सुरक्षित हो जाएगा।
मुआवजा देने का प्रावधान
इस एक्ट के तहत पशुपालन विभाग ने जिन लोगों के मुर्गों को मारा है उन्हें सरकार की ओर से मुआवजा का प्रावधान है। मुआवजा कितना होगा इस बारे में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। पशुपालन विभाग की ओर से ऐसे लोगों की रिपोर्ट तैयार की गई है।
ऑपरेशन बर्ड फ्लू पूरा हो गया है। अब झील का एरिया सुरक्षित माना जा सकता है। हमने केंद्र सरकार को भी इस बारे में रिपोर्ट भेज दी है। फिलहाल हाई अलर्ट को नहीं हटाया जाएगा। यहां आगे भी सैंपल लिए जाएंगे। एक सप्ताह बाद झील को खोला जा सकता है।
- डॉ. जीएस जाखड़, महानिदेशक, पशुपालन विभाग, हरियाणा।