हांसी। गांव पुठ्ठी मंगलखा की पीएचसी सेंटर पर डॉक्टरों के गैरहाजिर रहने पर शुक्रवार को ग्रामीणों ने ताला जड़ सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसकी सूचना पर पीएचसी में तैनात मेडिकल ऑफिसर डॉ. मनीष मौके पर पहुंचा तो ग्रामीणों ने उन्हें धक्के मारकर बाहर निकाल गया। इसके बाद नायब तहसीलदार और एसएमओ मौके पर पहुंचे और बेहतर चिकित्सा सुविधा का आश्वासन देकर ताला खुलवाया। बता दें कि वीरवार को भी ग्रामीणों ने पीएचसी पर ताला जड़ प्रदर्शन किया था।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव की पीएचसी में उन्हें कोई सुविधाएं नहीं मिल रही है। पीएचसी में दो चिकित्सक तैनात किए गए हैं, मगर वे आते ही नहीं। थोड़ा सा बीमार होते ही ग्रामीणों को शहर का रुख करना पड़ता है। इससे समय व पैसा दोनों बर्बाद होते हैं। बार-बार मांग करने के बावजूद उनकी परेशानी का हल नहीं निकाला जा रहा है। बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए उन्होंने शुक्रवार सुबह सवा 10 बजे पीएचसी को ताला जड़ दिया। करीब ढाई घंटे बाद नायब तहसीलदार और सोरखी एसएमओ के आश्वासन पर ग्रामीणों ने ताला खोला। इस मौके पर चांदीराम, राममेहर, धर्मवीर, जवाहर लाल, सोनू , चरण सिंह, रमेश, सुभाष, बलवीर, मास्टर रामकिशन, रामफल, सुभाष
डेंटल सर्जन के आश्वासन पर माने, फिर दोबारा जड़ा ताला
ग्रामीणों के पीएचसी को ताला जड़े जाने के बाद डेंटल सर्जन डॉ. रेणुका मौके पर पहुंची और लोगों को ताला खोलने के लिए समझाया। उन्होंने कहा कि जल्द चिकित्सक पहुंच जाएंगे। इस पर ग्रामीण मान गए और ताला खोल दिया। मगर काफी देर तक इंतजार करने के बावजूद जब चिकित्सक नहीं पहुंचे तो ग्रामीणों ने फिर से ताला जड़ दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने पिछले छह महीने से पीएचसी के चिकित्सकों का चेहरा तक नहीं देखा है।
12 में से सात कर्मचारी मिले गैरहाजिर
तालाबंदी की सूचना पर नायब तहसीलदार जगबीर सिंह मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों के स्टाफ के गैरहाजिर रहने के आरोपों के बाद उन्होंने स्टाफ की हाजिरी ली। 12 में से केवल पांच कर्मचारी ही पीएचसी में मौजूद मिले। ग्रामीणों ने कहा कि पीएचसी में 18 गांवों के लोग उपचार कराने आते हैं। मगर न तो यहां कोई चिकित्सक मिलता है और न ही कोई स्वास्थ्यकर्मी। इस दौरान सीएचसी सोरखी से एसएमओ डॉ. रामजोत सिंह मौके पर पहुंचे।
हाजिरी लगाने के बाद हो जाते हैं गायब
ग्रामीणों ने बताया कि पीएचसी में एक एमओ और एक डेंटल सर्जन की पोस्टिंग है। लंबे समय से यहां पर डॉक्टर नहीं आ रहे। उनसे पूछते हैं तो वह बताते हैं कि उनकी ड्यूटी हांसी में है, जबकि ड्यूटी के अनुसार उन्हें यहां होना चाहिए। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के लिए एक कच्चे कर्मचारी की ड्यूटी है। वह सप्ताह में केवल दो दिन ही आता है। यहां पर एमओ, एक डेंटल सर्जन, एक फार्मासिस्ट, एक एचआई, एक एलटी, एक स्टाफ नर्स के पद हैं, लेकिन यहां केवल केवल एमओ, डेंटल सर्जन, स्टाफ नर्स, एचआई की पोस्टिंग है।
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र का काम प्रभावित
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पीएचसी में 18 गांवों के ग्रामीण जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने आते हैं। यहां कर्मचारी न मिलने पर उन्हें चक्कर काटने पड़ते हैं। पहले किसी परिजन की मौत का दुख झेलते हैं और उसके बाद प्रमाण पत्र बनवाने के लिए धक्के खाते हैं।
पीएचसी में जो डॉक्टर तैनात हैं, वह हम पर दबाव बनाकर मरीजों को दवाएं दिलवाते हैं। यह हमारा काम नहीं हैं। हम तब तक दवा नहीं दे सकते जब तक डॉक्टर लिखित में न दे। अगर ऐसा चलता रहा तो वह सेंटर पर ड्यूटी नहीं कर सकेंगे। वह अपना तबादला करवा लेगी। - अर्चना यादव, स्टाफ नर्स,
ग्रामीणों ने मुझ पर जो आरोप लगाए हैं, वह निराधार हैं। वीरवार को मेरी नाइट ड्यूटी हांसी में थी। शुक्रवार को भी नाइट ड्यूटी हांसी है। मगर फिर भी मैं ग्रामीणों की समस्या सुनने पहुंचा था। ग्रामीण मेरी बात सुनने के लिए तैयार नहीं हैं। - डॉ. मनीष, एमओ, पीएचसी, पुठ्ठी मंगलखां
हमें जैसे ही पीएचसी पर ताला लगने की सूचना मिली, उसी समय मैं मौके पर पहुंच गया। वहीं पर एसएमओ रामजोत सिंह सोरखी को बुलवाकर सेंटर पर डॉक्टर का रोस्टर बनवा दिया है। अब ग्रामीणों की शिकायत अनुसार एसएमओ रामजोत सिंह सोरखी एक सप्ताह में रिपोर्ट तैयार करके भेजेंगे कि कौन-कौन सा स्टाफ व डॉक्टर सेंटर से अब तक गैरहाजिर रहा है। - जगबीर सिंह, नायब तहसीलदार, हांसी
हांसी: ग्रामीणों के बीच बैठ कर हाजरी रजिस्टर चेक करते नायब तहसीलदार जगबीर सिंह।- फोटो : Hisar
हांसी: ग्रामीणों को समझाने का प्रयास करते डॉ. मनीष।- फोटो : Hisar