हिसार। समाज को सकारात्मकता की ओर ले जाने से पहले खुद के आचरण बेहतर करना पड़ेगा। सकारात्मक सोच समाज की सबसे बड़ी ताकत होती है। वर्तमान समय में समाज में नकारात्मकता ज्यादा बढ़ती जा रही है। इसे रोकने के लिए सकारात्मक लोगों को एकजुट होकर अभियान चलाना होगा। महापुरुषों द्वारा दी गई शिक्षा व विचारों का पालन करना होगा। इसकी शुरुआत हमको स्वयं से ही करनी होगी। वहीं समाज में फैली बुराइयों व कुछ कुरीतियों को छोड़ना होगा। युवाओं को नशे से बचाव के प्रति जागरूक करना होगा। यह कहना है हमारे समाज के प्रबुद्धजनों का।
शनिवार को अमर उजाला हिसार कार्यालय में संवाद कार्यक्रम के तहत शनिवार को समाज को सकारात्मक दिशा कैसे दी जाए और नकारात्मकता को कैसे दूर किया जाए विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा का संचालन राजकीय महाविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रमेश आर्य ने किया। परिचर्चा में बिजली निगम से सेवानिवृत्त एसई सत्यपाल शर्मा, बहबलपुर गांव के पूर्व सरपंच धर्मपाल बागड़ी, बीएंडआर विभाग से सर्कल हेड पद से सेवानिवृत्त रतनलाल बड़गुज्जर, ढाणी खानबहादुर से सामाजिक कार्यकर्ता देशराज, राकेश बहबलपुर, राजकीय महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. सतीश वर्मा व बैंक ऑफ बड़ोदा से सेवानिवृत्त नरेश भारद्वाज ने मुख्य रूप से भाग लिया।
हमारे महापुरुष हमारी धरोहर हैं। हमें महापुरुषों द्वारा दी गई शिक्षाओं का पालन करना होगा। दूसरों की खुशी पर अपने घर में मिठाई बांटने वाला समाज बनाना है। इसके लिए जातिवादी मानसिकता को ऊपर उठना होगा व सामाजिक भाईचारा मजबूत करना होगा। - सत्यपाल शर्मा, रिटायर्ड एसई, बिजली निगम
समाज में सकारात्मक माहौल पैदा करने के लिए सबसे पहले स्वयं से शुरुआत करनी होगी। इसके बाद अपने घर, परिवार व अपने गांव को एकजुट करना होगा। तभी हमारा लक्ष्य पूरा होगा। हमें सकारात्मक लोगों का संगठन बनाकर सक्रिय होना पड़ेगा। - धर्मपाल बागड़ी, पूर्व सरपंच गांव बहबलपुर
हमारे माता-पिता ने सकारात्मक सोच रखते हुए हमें यहां तक पहुंचाया है। उस समय पारिवारिक माहौल सकारात्मक व मजबूत होता था। वर्तमान समय में एकल परिवार होने से संस्कार कम हो गए। अब जरूरत है बुजुर्गों व महापुरुषों के पद चिह्नों पर चलने की। - रतनलाल बड़गुज्जर, पूर्व अधिकारी, बीएंडआर
सकारात्मक सोच समाज को ऊर्जा प्रदान करती है, लेकिन वर्तमान समय में सकारात्मकता कम व नकारात्मकता ज्यादा फैल रही है। नकारात्मकता को खत्म करने के लिए खुद से शुरुआत करनी है व सहिष्णुता के साथ आगे बढ़ते जाना है। - देशराज सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता
नकारात्मकता पहले भी थी आगे भी रहेगी। नकारात्मकता आने के सामाजिक, राजनीतिक, पारिवारिक कारण भी हो सकते हैं। सबसे पहले हमें खुद का ही आचरण सकारात्मक करना होगा। सकारात्मकता लाने के लिए बेहतर शिक्षा और संस्कार देने के साथ-साथ सरकार व मीडिया को मिलकर काम करने की जरूरत है। - डॉ. सतीश वर्मा, राजकीय महाविद्यालय हिसार
हमें भारतीय संविधान में मिले मौलिक कर्तव्यों की पालना जरूरी है, लेकिन ज्यादातर लोगों द्वारा संविधान में अधिकारों की ही आवाज उठाई जाती है। मेरा कहना है कि मौलिक कर्तव्यों का पालन करेंगे तो हम सकारात्मक समाज का निर्माण कर सकते हैं। समाज से नकारात्मक दृष्टि के लोगों का प्रभाव खत्म करने के लिए सकारात्मक सोच के लोगों को और भी ज्यादा सक्रिय होना चाहिए। - नरेश भारद्वाज, पूर्व बैंक अधिकारी
सकारात्मक सोच समाज की सबसे बड़ी ताकत होती है। नकारात्मकता को रोकने के लिए सकारात्मक लोगों को एकजुट होकर अभियान चलाना होगा है। लोगों में नकारात्मकता आने के भी कई कारण है। सबसे पहले इन कारणों को पहचाना होगा व उनका निवारण खोजना होगा। युवाओं को इस अभियान से जोड़ना बहुत जरूरी है। सामाजिक बुराइयों व कुरीतियों को भी त्यागना होगा।
- डॉ. रमेश आर्य, राजकीय महाविद्यालय हिसार