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राष्ट्रीय माइग्रेन और सिरदर्द जागरूकता माह : व्यस्त जीवनशैली से बढ़ रहा माइग्रेन, नागरिक अस्पताल की ओपीडी में पांच साल में 6 गुना तक बढ़े मरीज,

Tue, 16 Jun 2026 01:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
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हिसार। वर्तमान की डिजिटल और भागदौड़ भरी जीवनशैली के कारण लोगों में माइग्रेन व सिरदर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है। सुबह का नाश्ता छोड़ना, अधूरी नींद और मानसिक तनाव इस बीमारी के मुख्य ट्रिगर बन रहे हैं। आमजन को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से ही जून माह को राष्ट्रीय माइग्रेन और सिरदर्द जागरूकता माह के रूप में मनाया जा रहा है।
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नागरिक अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. प्रशांत ने बताया कि मानसिक रोग ओपीडी में रोजाना लगभग 25 से 30 मरीज माइग्रेन की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं जबकि पांच साल पहले यह संख्या महज 5-10 थी। इस प्रकार ओपीडी में करीब 6 गुना तक की बढ़ोतरी देखी गई है।
डॉ. प्रशांत के अनुसार माइग्रेन मूलतः एक लाइफस्टाइल डिसऑर्डर है। इसके मुख्य कारणों में खाली पेट रहना, अत्यधिक स्क्रीन टाइम, तेज आवाज (साउंड एक्सपोजर) और अधूरी नींद शामिल हैं। इसके अलावा शरीर में विटामिन-डी और मैग्नीशियम की कमी भी इस दर्द को बढ़ाती है।
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स्वस्थ रहने के लिए इन उपायों का ध्यान रखें
- प्राणायाम करें व लंबी सांस की लें
- विचारों से ध्यान हटाने की तरीके अपनाएं
- नींद पूरी करें
- व्यायाम करें जिससे हैप्पी हार्मोन निकलते हैं
- सुबह के भोजन को न छोड़ें
- ज्यादा मिर्च-मसालायुक्त खान न खाएं
- ज्यादा शोर शराबे वाले वातावरण से दूर रहें
- घुमावदार रास्तों पर यात्रा करने से बचें
- तेज धूप में छाता व आंखों पर चश्मा लगाकर चलें
- तेज गर्मी व सर्दी से भी बचें
दवा व काउंसिलिंग से किया जाता है इलाज
डॉ. प्रशांत के अनुसार दवा व काउंसिलिंग से इलाज किया जा रहा है। सिरदर्द का इलाज दो तरह की दवा से किया जाता है। इनमें एक दवाई ज्यादा को रोकने व एक तरह की दवाई सिरदर्द के दौरान राहत के लिए दी जाती है। काउंसिलिंग से भी इलाज किया जा रहा है। इसमें मरीज को राहत के उपाय बताए जाते हैं। माइग्रेन की समस्या को खत्म तो नहीं किया जा सकता लेकिन सिरदर्द के एपिसोड को कम किया जा सकता है।
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इन लक्षणों से करें माइग्रेन की पहचान
सिर में तेज और असहनीय दर्द होना।
सिर की नसों में टीस (चपक-चपक) उठना।
दर्द का एक एपिसोड 4 घंटे से लेकर 72 घंटे या उससे अधिक समय तक रहना।
रोजाना दर्द बने रहना और तेज रोशनी या धूप से आंखों में परेशानी होना।
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