हिसार। हिसार और रोहतक के सरकारी अस्पतालों में करीब 24 घंटे तक वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं होने के कारण नवजात की मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने हरियाणा के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने कहा कि यदि मीडिया रिपोर्ट में सामने आए तथ्य सही हैं तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला है।
जानकारी के अनुसार बिहार के औरंगाबाद वर्तमान हिसार निवासी राकेश कुमार की पत्नी पूजा (26) को प्रसव के लिए हिसार के नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सिजेरियन डिलीवरी के बाद जन्मे नवजात को सांस लेने में दिक्कत होने पर एनआईसीयू में भर्ती किया गया लेकिन अस्पताल का एकमात्र वेंटिलेटर पहले से उपयोग में था।
परिजनों का आरोप है कि अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में भी वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं मिला। इसके बाद नवजात को रोहतक पीजीआई रेफर किया गया जहां भर्ती तो कर लिया गया लेकिन वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं होने के कारण इंतजार करने को कहा गया। अगले दिन भी वेंटिलेटर नहीं मिलने पर डॉक्टरों ने अन्य अस्पताल ले जाने की सलाह दी। परिजन बच्चे को लेकर वापस हिसार पहुंचे और निजी अस्पताल ले गए जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
राकेश कुमार का आरोप है कि यदि समय पर वेंटिलेटर मिल जाता तो उसके बच्चे की जान बच सकती थी। हिसार नागरिक अस्पताल की पीएमओ डॉ. रीना जैन ने बताया था कि एनआईसीयू का एकमात्र वेंटिलेटर पहले से व्यस्त था। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में भी सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण नवजात को बेहतर उपचार के लिए रोहतक रेफर किया गया था।