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नगर निगम ने जिस शेड को बनवाया, अब उसी को अवैध बताकर ढहा दिया

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तेलियान पुल सब्जी मार्केट में गिराया गया शेड। - फोटो : Hisar
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हिसार। तेलियान पुल पर नगर निगम ने जिस शेड का निर्माण करवाया था, रविवार रात उसी को अवैध बताकर ढहा दिया। निगम अधिकारियों की मानें तो यह शेड के कब्जे में साथ लगते दुकानदार की सात गज जमीन आई हुई थी। उक्त दुकानदार इस जमीन के टुकड़े पर कब्जा दिलवाने को लेकर कोर्ट भी जा चुका था। साथ ही उसने सीएम विंडो भी मामले की शिकायत की हुई थी।
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वहीं, निगम की कार्रवाई के विरोध में तेलियान पुल सब्जी मार्केट के व्यापारियों ने सोमवार सुबह मार्केट बंद कर और धरना देकर रोष जताया। उनका आरोप था कि निगम ने बिना कोई नोटिस दिए ही शेड को ढहा दिया, जबकि वह कई वर्षों से यहां सब्जी बेच रहे हैं। सब्जी व्यापारी इस मामले में निगमायुक्त अशोक गर्ग से भी मिले। निगमायुक्त ने उनकी समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया। इस पर सब्जी व्यापारियों ने शाम को मार्केट खोल दी। निगमायुक्त ने भी शाम को मौके का निरीक्षण किया।
बता दें कि रविवार रात को नगर निगम की भवन शाखा ने शहर की जैन गली व तेलियान पुल पर अवैध निर्माण पर कार्रवाई की थी। इस दौरान टीम ने जैन गली में 30 दुकानों के आगे बने अवैध चबूतरों व तेलियान पुल सब्जी मार्केट में एक शेड को गिराया था।
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सुबह पहुंचे दुकानदार तो शेड मिला ध्वस्त
दुकानदार नरेश कटारिया, पप्पू सैनी, सुरेंद्र, दीपक, श्यामसुंदर, लालचंद आदि ने बताया कि जब सोमवार सुबह दुकानदार यहां पहुंचे तो यह शेड गिरा हुआ था। पता चला कि निगम की टीम ने रविवार रात को इस अवैध बताकर गिरा दिया। दुकानदारों के मुताबिक निगम ने ही यह शेड का निर्माण करवाया था। वह यहां सब्जी बेचने के नाम पर तहबाजारी फीस भी देते हैं। इस कार्रवाई से पहले निगम ने सिर्फ मौखिक रूप से उन्हें कहा था। उन्हें किसी का तरह का नोटिस नहीं दिया गया। दुकानदारों ने आरोप लगाया है कि जिस दुकानदार की तरफ से यह शिकायत की गई है, उसने खुद नियमों के खिलाफ बेसमेंट का निर्माण किया हुआ है, जो सड़क तक बना हुआ है।
पूर्व मंत्री सावित्री जिंदल ने करवाया था निर्माण
पूर्व मंत्री सावित्री जिंदल ने इस शेड का वर्ष 2013 में निर्माण करवाया था। उस समय वह शहरी स्थानीय निकाय मंत्री थीं। शेड के ऊपर भी उनके नाम का बोर्ड लगा हुआ है। निगम अधिकारी भी यह मान रहे हैं कि उन्होंने ही इस शेड का निर्माण करवाया था। निगम अधिकारियों के अनुसार साथ लगते दुकानदार ने वर्ष 2016 में सात गज और जमीन देने की मांग की थी, जिस पर नगर निगम ने उसे जगह दे दी थी। मगर शेड के निर्माण के चलते वह सात गज जमीन का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा था। इसे लेकर उसने उपभोक्ता कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। इसके अलावा उसने मामले की सीएम विंडो पर भी कई बार शिकायत कर रखी थी।
निगमायुक्त से मिले दुकानदार
सब्जी व्यापारी सोमवार को निगमायुक्त अशोक गर्ग से मिले। उन्होंने कहा कि नगर निगम ने यह कार्रवाई बिना बताए की है। वे यहां सब्जी बेचने के नाम की फीस भी दे रहे हैं। इस पर निगमायुक्त ने कहा कि तहबाजारी फीस देने का मतलब यह नहीं है कि आपको उस जगह का मालिकाना हक मिल जाएगा। इस पर निगम अधिकारियों ने बताया कि वह पिछले एक साल इनसे तहबाजारी फीस नहीं ले रहे थे और शेड हटाने को लेकर कई बार दुकानदारों को बोल चुके थे। निगमायुक्त ने कहा कि वह पहले मौके का निरीक्षण करेंगे।
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जांच के बाद फैसला होगा
मैंने मौके का निरीक्षण किया था। फाइलों की जांच के बाद ही इस मामले पर अंतिम फैसला किया जाएगा।
-अशोक गर्ग, निगमायुक्त।
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