बिजली निगम द्वारा नगर निगम को बिजली चोरी की एवज में 1 करोड़ 61 लाख रुपये का जुर्माना लगाए जाने के मामले के बाद अब नगर निगम ने डीएचबीवीएन को करारा झटका दिया है। नगर निगम ने छह साल से बकाया 13 यूनिट का 6 करोड़ 29 लाख 67 हजार 776 रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स बिल भेजा है।
नगर निगम ने प्रॉपर्टी बिल न भरने पर डीएचबीवीएन को जुर्माना नोटिस दोबारा भेजा है। डीएचबीवीएन द्वारा जुर्माना लगाए जाने के बाद निगम हरकत में आया है। हालांकि अधिकारियों का यह भी कहना है कि निगम ने कोई बिजली चोरी नहीं की। बेवजह निगम पर जुर्माना थोपा गया है।
15 साल से एम टैक्स का प्रति यूनिट खपत के हिसाब से मांगा हिसाब
नगर निगम ने बिजली निगम को लेकर अब गड़े मुर्दे उखाड़ने शुरू कर दिए हैं। अधिकारियों ने बिजली निगम से वर्ष 2000 से अब तक 15 साल का एम टैक्स का हिसाब मांगा है। अधिकारियों का कहना है कि प्रति यूनिट पर निगम का 5 पैसे एम टैक्स बनता है।
निगम हमें खपत पर नहीं बल्कि भुगतान के हिसाब से एम टैक्स दे रहा है। नगर निगम शहर भर की स्ट्रीट लाइट व अन्य बिजली का खर्च निकालकर भी सालभर में करोड़ों रुपये बिजली निगम से ले लेते हैं। अधिकारियों ने कहा कि अगर नियम की बात करें तो बिजली निगम को शहर में होने बिजली खपत पर निगम को एम टैक्स दे, न की लोगों द्वारा भरे गए बिल पर।
प्रदेश के तीन शहरों की निगमों को हो रही है एमटैक्स से आमदनी
प्रदेश के तीन शहर जिनमें हिसार, पानीपत व पंचकूला ऐसे नगर निगम हैं जहां एमटैक्स का पैसा आमदनी के रूप में आता है। यानी नगर निगम की आय का स्रोत बना है। अन्य नगर निगमों की बात करें तो यह एम टैक्स का पैसा निगम द्वारा खर्च की जा रही बिजली के खर्च में ही कट जाता है। यहां खपत भी ठीक है, इसके बावजूद निगम बिजली निगम से बिल भरने के बाद भी लाखों रुपये हर महीने बचत के रूप में ले लेता है।
51 मीटर किए अप्लाई
चोरी का केस बनाए जाने के बाद नगर निगम ने शहर में स्ट्रीट लाइटों के मीटर पर कनेक्शन करने को लेकर नए 51 बिजली मीटर अप्लाई कर दिए हैं। निगम ने डीएचबीवीएन से लोड बढ़वाने की भी एप्लीकेशन लगाई है। ताकि भविष्य में उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
नोटिस मिलने के बाद एमडी के समक्ष लगाई अपील
अधिकारियों ने बताया कि चोरी का केस बनाकर जुर्माना लगाने के मामले के बाद नगर निगम ने एमडी के समक्ष अपील लगाई है। ये जुर्माना कैसे बनाया गया है उसकी जानकारी मांगी गई है। साथ ही जब फिक्स चार्ज निगम से लिया जा रहा था तो अब जुर्माना लगाने का क्या औचित्य।
डीएचबीवीएन को 6.29 करोड़ का प्रॉपर्टी टैक्स भेजा गया है। वर्ष 2000 से एम टैक्स के बारे में उनसे सूचना मांगी गई है। उन्होंने जो जुर्माना निगम पर लगाया है हम भरने को तैयार हैं।
- अरविंद बिश्नोई, ईओ नगर निगम