20 अप्रैल को शिवांगी के पिता राजेश पाठक और मां आरती पाठक बेटी से मिलने शाम सात बजे काठमांडू पहुंचे। आरती ने बताया कि इस दौरान शिवांगी शारीरिक रूप से बहुत कमजोर थी, लेकिन मानसिक रूप से पहाड़ों जितनी शक्तिशाली लग रही थी।
आयुर्वेद चिकित्सा से चौथे दिन तबीयत में आया सुधार
आरती पाठक ने बताया कि शिवांगी की हिम्मत और जज्बे को देखते हुए आयुर्वेद चिकित्सा की शुरुआत कर उसको एक होटल में ही आइसोलेट किया गया। इस दौरान शिवांगी को काढ़ा दिया गया और ट्रीटमेंट शुरू कर दिया। तीन दिन तक शिवांगी की तबीयत खराब रही, लेकिन चौथे दिन उसकी तबीयत में सुधार आना शुरू हो गया।
शिवांगी की तबीयत बिगड़ने पर उसके माता-पिता उसे अपने साथ घर ला रहे थे, लेकिन शिवांगी की हिम्मत और दृढ़ निश्चय ने माता-पिता को मजबूर कर दिया। 29 अप्रैल तक वह बिल्कुल ठीक हो गई। दोबारा से जांच में पता चला कि उसके फेफड़ों का इंफेक्शन भी खत्म हो गया और कोरोना रिपोर्ट भी निगेटिव आ गई। उसके बाद एजेंसी 8 के एक्सपीडिशन और पायोनियर के सदस्य लापता दाई, पेंबा दाई, निवेश भाई ने शिवांगी को हिम्मत दी और कहा कि तुम ठीक हो। हम तुम्हें दोबारा से माउंट ल्होत्से को फतेह करवाने के लिए ले जाएंगे।
आरती पाठक ने बताया कि बेटी दोबारा से 8 मई को बेस कैंप पहुंच चुकी है और अब वह कैंप टू के लिए निकल चुकी है। उन्होंने कहा कि शिवांगी 25 मई तक माउंट ल्होत्से, जोकि विश्व की चौथी सबसे ऊंची चोटी है और उसकी ऊंचाई 8516 मीटर है, पर तिरंगा फहराएगी।