विद्युत नगर के ग्राउंड में चल रही रामलीला में वन में माता सीता को खोजते राम व लक्ष्मण।
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हिसार। विद्युत नगर के ग्राउंड में श्री बद्री केदार रामलीला समिति की ओर से चल रही रामलीला में सोमवार को रावण-अंगद संवाद और लक्ष्मण मूर्च्छा का मंचन दिखाया गया। रामलीला में मुख्य अतिथि के रूप में मनोनीत पार्षद कैप्टन नरेंद्र शर्मा एवं सतीश सुरलिया पहुंचे। रामलीला समिति के प्रधान मुकेश रावत ने बताया कि मंगलवार को मेघनाथ, कुंभकर्ण और अहिरावण वध लीला का मंचन होगा। वहीं दशहरा पर्व पर पूर्व मंत्री सावित्री जिंदल मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचेगी। रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों का दहन होगा।
इससे पहले रामलीला मंचन में दिखाया गया कि रामचंद्र महाबली अंगद को लंका में जाने के लिए कहते हैं। अंगद बाली का पुत्र था। बाली अपने पुत्र से सर्वाधिक प्रेम करता था। ये परम बुद्धिमान, अपने पिता के समान बलशाली तथा भगवान श्रीराम के परम भक्त थे। अपने छोटे भाई सुग्रीव की पत्नी और सर्वस्व हरण करने के अपराध में भगवान राम के हाथों बाली की मृत्यु हुई। मरते समय बाली ने भगवान राम को ईश्वर के रूप में पहचाना और अपने पुत्र अंगद को उनके चरणों में सेवक के रूप में समर्पित कर दिया।
भगवान राम को अंगद के शौर्य और बुद्धिमत्ता पर पूर्ण विश्वास था। इसलिए उन्होंने रावण की सभा में युवराज अंगद को अपना दूत बनाकर भेजा और यह कहलवाया कि यदि रावण सीता को सम्मान सहित वापस लौटा दे तो वह युद्ध नहीं करेंगे। रावण नीतिज्ञ था। उसने भेद नीति से काम लेते हुए अंगद से कहा ऽबालि मेरा मित्र था ये राम-लक्ष्मण बाली को मारने वाले हैं। यह बड़ी लज्जा की बात है कि तुम अपने पितृ घातियों के लिये दूतकर्म कर रहे हो राम के दूत रूप में महाबली अंगद ने रावण को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह अपने इरादे से टस से मस नहीं हुआ।