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Hisar News: आईडब्ल्यूएल में मंगाली की नेहा-काजल दिखाएंगी किक का दम

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 कैंप में अभ्यास के दौरान काजल कांटीवाल।
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हिसार। इंडियन वुमन फुटबाल लीग (आईडब्ल्यूएल) में मंगाली की बेटी नेहा और काजल किक का दम दिखाएगी। दोनों बेटियां ओडिशा फुटबाल क्लब की ओर से खेलेगी। इस लीग के लिए काजल को ढाई लाख तो नेहा को तीन लाख का पैकेज मिला है। अब दोनों बेटियां 10 जनवरी से लीग में किक का दम दिखाएंगी। लीग के मैच दिल्ली, ओडिशा, चेन्नई, बंगलूरू और कोलकाता में होंगे।
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19 साल की काजल 10 साल से फुटबाल खेल रही है। जबकि नेहा ने 2018 में फुटबाल से अपने कॅरिअर की शुरुआत की थी। अब तक दोनों बेटियां राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत नाम चमका चुकी हैं। फिलहाल नेहा और काजल भुवनेश्वर में चल रहे कैंप में अभ्यास कर रही हैं।
पिता ने काजल को खेलने से कर दिया था मना
19 वर्षीय काजल बताती हैं कि उसने बड़ी बहन ज्योति से प्रेरणा लेकर फुटबाल खेलना शुरू किया। बहन को खेलते देख धीरे-धीरे उसकी फुटबाल खेलने के प्रति रूचि बढ़ने लगी, लेकिन पिता ने खेलने से मना कर दिया था। वह कहने लगे कि आप घर पर रहो, खेल कर क्या करोगे। इसके बाद फिजिकल लेक्चरार सुखविंद्र कौर ने काजल के पिता को समझाया तो बेटी को मैदान भेजने के लिए राजी हुए। उसके बाद बेटी ने मैदान में जाना शुरू कर दिया और पीछे मुड़कर नहीं देखा। काजल राष्ट्रीय स्तर पर 5 पदक जीत चुकी हैं। वहीं, अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक भी जीत चुकी हैं।
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किसान परिवार की नेहा ने पाया मुकाम
18 साल की नेहा बताती हैं कि उसने गांव की सीनियर लड़कियों को खेलते देखा तो 2018 में फुटबाल से अपने कॅरिअर की शुरुआत की। राष्ट्रीय स्तर पर नेहा दो बार रजत और एक कांस्य पदक हासिल कर चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 2 रजत और 1 कांस्य पदक पर भी कब्जा कर चुकी हैं। नेहा बताती है कि यहां तक पहुंचाने में फिजिकल लेक्चरार सुखविंद्र कौर, कोच पंकज कुमार, अश्वनी कुमार, नरेंद्र कुमार का काफी सहयोग रहा है। पिता धर्मबीर किसान है। नेहा की बहन तमन्ना भी राष्ट्रीय स्तर की फुटबाल खिलाड़ी हैं।

खेल के दम पर 25 बेटियों ने पाई सरकारी नौकरी
मंगाली के गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में वर्तमान में 100 से ज्यादा बेटियां फुटबाल का प्रशिक्षण ले रही हैं। 25 बेटियाें ने खेल के दम पर सरकारी नौकरी हासिल की। मैदान में देश के लिए पसीना बहाने वाली अधिकतर बेटियों के परिवार की हालत दयनीय है। विपरीत परिस्थितियों में भी बेटियों ने हार नहीं मानी और मैदान पर संघर्ष जारी रखा। माता-पिता ने मजदूरी कर बेटियों के सपनों को पंख लगाए। आज बेटियां राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत देश का नाम रोशन कर रही हैं।

 कैंप में अभ्यास के दौरान काजल कांटीवाल।

 कैंप में अभ्यास के दौरान काजल कांटीवाल।

 कैंप में अभ्यास के दौरान काजल कांटीवाल।

 कैंप में अभ्यास के दौरान काजल कांटीवाल।

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