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दुराचार पीड़िता ने थाने में पीया जहर

Thu, 17 Jul 2014 11:17 PM IST
हिसार, हांसी
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न्याय न मिलने पर दुराचार पीड़िता ने बृहस्पतिवार दोपहर सदर थाने में जहरीला स्प्रे पी लिया। महिला को पुलिस ने सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया, जहां से उसे प्राथमिक उपचार के बाद हिसार रेफर कर दिया गया। महिला ही हालत गंभीर बनी हुई है। महिला ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने दुराचार पीड़ितों को गिरफ्तार करने की बजाय केस को ही निरस्त कर दिया। पीड़िता ने थाने के एक एएसआई पर आरोपियों से मिलीभगत के आरोप जड़े हैं।
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दुराचार मामले की एक पीड़िता बृहस्पतिवार को स्प्रे की शीशी हाथ में लेकर सदर थाने में पहुंची। वह सीधे एएसआई कैलाश के कमरे में गई और पुलिस पर उसकी सुनवाई न करने का आरोप लगाया। महिला ने कहा कि वह थाने में ही जान दे देगी और उसने स्प्रे पी लिया। महिला ने कहा कि दिसंबर 2013 में गंगनखेड़ी में उसके साथ दुराचार हुआ था और पुलिस ने एक व्यक्ति व दो महिलाओं के खिलाफ मामला दर्ज भी किया था। उसने आरोप लगाया कि पुलिस ने बाद में घूस लेकर मामले को रद कर दिया।
 
पीड़िता ने कहा कि अब वह जीना नहीं चाहती है। पुलिस ने उसे इंसाफ नहीं दिया। इसलिए उसने थाने में ही जान देने का फैसला लिया है। महिला ने सदर थाने में एएसआई के कमरे में ही उल्टियां भी की। काफी देर तक पुलिस कर्मी महिला को अस्पताल पहुंचाने की बजाय थाने में ही उसे घरेलू उपचार देने में जुटे रहे। मौके पर पहुंचे मीडिया कर्मियों ने जब महिला को अस्पताल ले जाने की नसीहत दी तो आनन-फानन में एक कार में महिला को अस्पताल ले जाया गया।
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पुलिस ने सफाई दी कि चूंकि थाने में कोई गाड़ी नहीं थी और पीसीआर पहुंच नहीं सकी थी, इसलिए देरी हो गई। उधर, इस मामले में जिस पुलिस अधिकारी कैलाश चंद्र पर आरोप लग रहे हैं, उनका कहना है कि दुराचार का मामला उन्होंने जांच के दौरान झूठा पाया था। उन्होंने उच्चाधिकारियों के निर्देश के मुताबिक उसे रद कर दिया था। कैलाश ने कहा कि महिला का अपने रिश्तेदारों से रुपयों के लेनदेन का विवाद है। इसी विवाद में दुराचार के आरोप लगाए गए थे। एएसआई ने कहा कि घूस लेकर मामला निरस्त करने के आरोप बेबुनियाद हैं।
 
जिस वक्त महिला हाथ में जहर की शीशी लेकर थाने में दाखिल हुई, उस समय गेट पर कोई संतरी तक नहीं था। महिला ने जहर निगल लिया, लेकिन साथ के कमरे में मौजूद पुलिसकर्मी अपने काम में व्यस्त रहे। थाने का मुंशी सुरेंद्र उठकर जरूर आया और एक-दो पुलिस कर्मी भी आए, लेकिन कुछ पुलिस कर्मचारियों ने नजदीक आना भी मुनासिब नहीं समझा। मुंशी फोन कर दूसरे कर्मियों से मदद मांगता रहा। कमाल की बात यह है कि पूरे थाने में इस कांड के दौरान एक भी महिला पुलिस कर्मी मौजूद नहीं थी। यही वजह रही कि पुरुष पुलिस कर्मियाें को ही पीड़ित महिला को लेकर अस्पताल पहुंचना पड़ा।

पीड़ित महिला को अस्पताल में ले जाने की बजाय पुलिस कर्मियाें को इस बात की चिंता सताती रही कि कहीं अखबारों में इसकी सुर्खियां न बन जाए। पुलिस महिला की मदद करने की बजाए मीडिया कर्मियों से उलझते नजर आए।

डीएसपी सिद्धार्थ ढांडा ने बताया कि सदर थाने में स्प्रे पीने वाली महिला के खिलाफ आत्महत्या की कोशिश करने के आरोप में सिटी थाने में मामला दर्ज किया गया है। डीएसपी ने बताया कि महिला का भैंसों की खरीद-फरोख्त को लेकर रुपयाें का विवाद था। जिसके चलते उसने अपने रिश्तेदारों पर भी दुराचार के आरोप लगाए थे। तीन महीने पहले ही पुलिस इस केस को खारिज कर चुकी थी। डीएसपी ने कहा कि पुलिस पर रुपये लेने के आरोप बेबुनियाद हैं।

पुलिस अधीक्षक विकास धनखड़ ने कहा है कि थाने में स्प्रे पीकर आत्महत्या की कोशिश करने वाली महिला के खिलाफ पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 309 के तहत केस दर्ज किया है। एसपी ने कहा कि महिला ने स्प्रे क्यों पीया, इस बारे में जांच की जा रही है।
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