सामान्य अस्पताल मंगलवार रात करीब करीब सवा ग्यारह बजे से लेकर सुबह
करीब साढ़े छह बजे तक झगड़े का अखाड़ा बना रहा। रात को पहले कर्मचारी आपस
में कंट्रोल रूम 102 नंबर में भिड़े, फिर सुबह सीएमओ ने कर्मचारियों को
बातचीत के लिए बुलाया तो एंबुलेंस चालकों ने मिलकर डिप्टी सीएमओ के चालक को
लात-घूंसों से पीट-पीटकर घायल कर दिया।
इतना ही नहीं बीच-बचाव के बाद जैसे
ही डिप्टी सीएमओ का चालक घर पहुंचा तो उस पर सीएमओ के चालक सहित कुछ
चालकों ने मिलकर दोबारा हमला कर दिया। रात को ही विरोध स्वरूप एंबुलेंस
चालकों ने 40 गाड़ियां अस्पताल परिसर में खड़ी कर दी और इमरजेंसी सेवाएं
बंद कर दी। कुल मिलाकर जिले में मंगलवार रात करीब 12.30 से लेकर सुबह 6.30
बजे तक एंबुलेंस सेवा ठप रही। अस्पताल प्रशासन इमरजेंसी सेवा बंद करने वाले
कर्मचारियों पर कोई कंट्रोल नहीं कर पाया। शुक्र है भगवान का इस दौरान
जिले में कहीं कोई इमरजेंसी दुर्घटना नहीं घटी, वरना उसका जिम्मेदार कौन
होता। वहीं डिप्टी सीएमओ के चालक सोमबीर ने पुलिस में शिकायत दे दी है।
रात करीब साढ़े 11 बजे डिप्टी सीएमओ जितेंद्र शर्मा के चालक सोमबीर ने
एंबुलेंस अपने गांव अनीपुरा भेजने के लिए कॉल की। सोमबीर का कहना था कि
उसके पिता अस्थमा के मरीज है, जिन्हें रात को अधिक तकलीफ हो गई थी। सोमबीर
ने इमरजेंसी में दो बार कॉल की, जिसे किसी ने अटेंड नहीं किया। वह सामान्य
अस्पताल के क्वार्टर नंबर छह में रहता है तो वहीं से कंट्रोल रूम में चला
गया।
वहां जाने के बाद मौके पर मौजूद ऑपरेटर नरेश और रणधीर के साथ उसका
झगड़ा हो गया। एंबुलेंस फिर भी नहीं भेजी गई। मामले के बारे में ऑपरेटरों
ने सभी चालकों के पास फोन कर दिया। जिले में जहां भी पीएचसी या फिर सीएचसी
पर जितनी एंबुलेंस तैनात थी, सभी ने ड्यूटी न समझते हुए सामान्य अस्पताल
में लाकर एंबुलेंस खड़ी कर दी। गाड़ियां रात करीब साढ़े 12 बजे से लेकर
सुबह साढ़े 6 बजे तक सामान्य अस्पताल परिसर में ही खड़ी रही। किसी ने भी
इमरजेंसी एंबुलेंस सेवा नहीं दी। मामले के बारे में सुबह जैसे ही सीएमओ को
पता चला तो उन्होंने सोमबीर को माफी के लिए बुलाया।
साढ़े छह बजे ही
कंट्रोल रूम के सामने एंबुलेंस और अन्य सरकारी गाड़ियों पर तैनात ड्राइवरों
ने सीएमओ अशोक चौधरी के सामने ही लात-घूंसों से पीटना शुरू कर दिया। इनमें
से कुछ ने बीच-बचाव किया। बड़ी मुश्किल से वह वहां से निकल भागा और अपने
क्वार्टर पर जा पहुंचा। सोमबीर के अनुसार सीएमओ की गाड़ी के चालक रामनिवास,
उसका भाई सतबीर और अन्य चार-पांच चालकों ने मिलकर उसके क्वार्टर पर
पहुंचकर फिर हमला कर दिया। सोमबीर और उसकी पत्नी सुमन ने घर के कमरों को
अंदर से बंद कर बड़ी मुश्किल से जान बचाई।
बताया गया है कि रात को पिता को इलाज सुविधा न मिल पाने के चलते दोनों
कर्मचारियों में कहासुनी हो गई थी। इसी बात से खफा होकर एंबुलेंस इमरजेंसी
सेवा को ठप कर दिया गया। इस बात को सोमबीर ने स्वीकार भी किया। क्योंकि जब
सीएमओ अशोक चौधरी ने उसे फोन कर माफी मांगने के लिए बुलाया था तो वह वहां
पहुंच गया। मौके पर मौजूद ड्राइवरों ने जब सोमबीर को कहा कि वे उन सब से
माफी मांगे। उसने कहा कि वह डॉक्टरों से माफी मांग लेगा और जिनके साथ उसकी
कहासुनी हुई, उनसे माफी मांग लेगा, लेकिन चालकों के साथ वह क्यों माफी
मांगे। इसी के चलते दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई।
फ्लीट मैनेजर प्रदीप ने बताया कि डिप्टी सीएमओ के चालक सोमबीर को अपने पिता
को लाने के लिए एंबुलेंस चाहिए थी। मौके पर मौजूद ऑपरेटर उसे नहीं जानता
था। दोनों की इसी बात पर बहस हो गई। इस पर सोमबीर ने उसे पीटना शुरू कर
दिया। वहां मौजूद चार पांच अन्य चालकों ने उन्हें अलग-अलग करवाया। फ्लीट
मैनेजर ने एंबुलेंस सेवा ठप होने की बात पर कहा कि एक घंटा चालकों ने
एंबुलेंस सर्विस नहीं दी, बाकी पूरा दिन-रात एंबुलेंस सेवाएं चालू रही।
डीसी व एसपी भी कर चुके हैं चौकी के लिए दौरा
सामान्य अस्पताल एक बार फिर अखाड़ा बना रहा। मौन प्रशासन यह चाहता ही नहीं
कि सामान्य अस्पताल में शांति व्यवस्था बनी रहे। अस्पताल प्रशासन कई बार
परिसर में चौकी बनाए जाने की मांग कर चुका है, लेकिन डीसी और एसपी भी
अस्पताल पहुंचकर हकीकत से रू-ब-रू हो चुके हैं। बावजूद इसके अस्पताल
प्रशासन में चौकी बनाए जाने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए।
माफी मांगने के मामले पर विवाद बढ़ा था। हमने कंट्रोल रूम वालों के खिलाफ
मामला दर्ज करने के लिए पुलिस को लिख दिया है। एंबुलेंस सेवा ठप क्यों की
गई, झगड़ा किस बात पर हुआ, इन सब मामलों की जांच कर विभागीय कार्रवाई भी की
जाएगी। डॉ. अशोक चौधरी, चीफ मेडिकल ऑफिसर हिसार।