पत्रकारों से बातचीत करते स्मारक निधि के अध्यक्ष रामचंद्र राही।
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हिसार। महात्मा गांधी नई तकनीक या उद्योग के खिलाफ नहीं, बल्कि मनुष्य के शोषण के खिलाफ थे। इसीलिए वे चरखे और खादी के पक्ष में रहे। चरखा और खादी हमारी अर्थ व्यवस्था के आधार थे। आज पूंजीपतियों के नियंत्रण में मनुष्य के शोषण के अंग बने हुए हैं। यह कहना है केंद्रीय गांधी स्मारक निधि (राजघाट नई दिल्ली) के अध्यक्ष रामचंद्र राही का। वह रविवार को सर्वोदय भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता पीके संधीर ने राम चंद्र राही को जय नारायण वर्मा सम्मान से सम्मानित किया।
राही ने दुख व्यक्त किया कि आज साबरमती आश्रम और सेवाग्राम युवाओं के लिए विचार के प्रतीक थे, उन्हें पर्यटन स्थल में बदलने की कोशिशें की जा रही हैं। यही हाल बनारस में काशीनाथ का किया जा रहा है जो हमारी आस्था का प्रतीक था, उसे भी पर्यटन स्थल बना कर टिकट लगाई जाएगी। गांधी जी ने साबरमती आश्रम में अपने लिए कुटिया बनवाई थी क्योंकि बड़ी लड़ाई या बड़ा काम करने के लिए महलों में रहने की जरूरत नहीं थी।
कंगना रानौत द्वारा वर्ष 1947 की आजादी को महात्मा गांधी को दी गई भीख कहने पर राही ने कहा कि वैसे तो ऐसे लोगों के सवाल पर क्या कहा जाए। जिन लोगों को देश के स्वतंत्रता के संघर्ष व आंदोलन की समझ ही नहीं है। महात्मा गांधी ने बचपन से अंत तक सत्य व अहिंसा की लड़ाई लड़ी उनके बारे में ऐसी ओछी बात कहना कंगना के मानसिक स्तर को ही दर्शाता है। इस मौके पर राधेश्याम शुक्ल, महेंद्र विवेक, रश्मि, शैलेश वर्मा, सत्यपाल शर्मा, वीरेंद्र कौशल, राधेश्याम गुप्ता, भगत देवराज आदि मौजूद रहे।