मनरेगा में संशोधन के विरोध में सिवानी मंडी में नारेबाजी करते हुए सीपीआई(एम) व आरएमपीआई के कार्य
सिवानी मंडी। वामपंथी पार्टियों के आह्वान पर सोमवार को सिवानी में सीपीआई और आरएमपीआई के कार्यकर्ताओं ने मनरेगा में किए गए संशोधनों के विरोध में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।
सीपीआई (एम) नेता अंतर कस्वां व कुलदीप सिंह तथा आरएमपीआई नेता आजाद सिंह ने कहा कि सरकार मनरेगा का नाम बदलकर और नियमों में बदलाव कर इस योजना को धीरे-धीरे खत्म करने की कोशिश कर रही है। इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पहले मनरेगा का पूरा बजट केंद्र सरकार वहन करती थी, लेकिन अब 60:40 के अनुपात में खर्च राज्य सरकारों पर डाल दिया गया है। इससे केंद्र की जवाबदेही खत्म हो जाएगी और मजदूरों को काम मिलना और मुश्किल हो जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले ग्राम सभा और पंचायत यह तय करती थीं कि गांव में कौन-कौन से कार्य मनरेगा के तहत होंगे, लेकिन अब सरकार स्वयं कार्य तय करेगी, जिससे स्थानीय जरूरतों की अनदेखी होगी। नहरों, नालों की सफाई और चहारदीवारी के अंदर होने वाले कार्य पहले ही बंद कर दिए गए हैं। इसके चलते न केवल मजदूरों, बल्कि किसानों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
वाटर वर्क्स की सफाई न होने से गांवों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। वाम नेताओं ने मांग की कि मनरेगा के कार्य तुरंत शुरू किए जाएं, मजदूरों को साल में 200 दिन का रोजगार दिया जाए और दिहाड़ी बढ़ाकर 800 रुपये प्रतिदिन की जाए। इस मौके पर राजबीर लीलस, राजबीर सिंधु, महेंद्र गोदारा, साधु राम रूपाणा, जंगबीर सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।