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आरक्षण आंदोलन के अलर्ट पर जाट धर्मशाला पहुंची सीआरपीएफ

Sun, 29 May 2016 12:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
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आरक्षण आंदोलन अलर्ट पर जाट धर्मशाला पहुंची सीआरपीफ - फोटो : bureau
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जाट आरक्षण के लिए 5 जून के अल्टीमेटम पर अलर्ट हुए प्रशासन ने हिसार में सीआरपीएफ को तैनात कर दिया है। शनिवार को जाट धर्मशाला में सीआरपीएफ की टुकड़ी पहुंची। अभी इस टुकड़ी के पास इससे आगे कहीं जाने का निर्देश नहीं है।
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प्रदेश सरकार की ओर से दिए गए जाट आरक्षण पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की ओर से स्टे ऑर्डर होते ही जिले में अलर्ट घोषित कर दिया गया। आरक्षण को लेकर संवेदनशील रहे हिसार जिले में शुक्रवार की देर रात से ही सीआरपीएफ बल तैनात कर दिया गया। सीआरपीएफ की एक टुकड़ी जाट धर्मशाला में पहुंची है।

सीआरपीएफ की इस टुकड़ी में 79 सदस्य हैं। सहायक कमांडेंट सूरजमल के अलावा एक इंस्पेक्टर, दो सब इंस्पेक्टर, तीन असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर आए हैं। सहायक कमांडेंट सूरजमल ने बताया कि प्रशासन से कोऑर्डिनेट कर टुकड़ी यहां पहुंची है। टीम को फिलहाल जाट धर्मशाला में ही ठहरने के आदेश हैं। आदेश मिलने के बाद सीआरपीएफ टीम को दूसरे स्थानों पर भेजा जाएगा।
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सीआरपीएफ को लेकर पुलिस अधीक्षक को जिम्मेदारी दी गई है। एसपी इस टीम के साथ समन्वय कर रहे हैं। जिले में स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। एहतियात के तौर पर सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
- ओपी सिंह, पुलिस महानिरीक्षक, हिसार

हांसी में ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मांग
हांसी के एसडीएम प्रदीप अहलावत ने डीसी हिसार को पत्र लिखकर हांसी में ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त करने की मांग की है। एसडीएम ने हांसी को संवेदनशील एरिया बताते हुए प्रमुख सड़कों के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट मांगे हैं। इसमें हिसार-दिल्ली नेशनल हाईवे, हांसी-सिसाय, हांसी-नारनौंद रूट को संवेदनशील माना है।

संवेदनशील जिलों में हिसार
जाट आरक्षण को लेकर हिसार संवेदनशील जिला रहा है। सभी आंदोलनों की शुरुआत हिसार जिले के गांव मय्यड़ से ही होती रही है। हिसार जिले में जाट आरक्षण को लेकर फरवरी माह में हुए आंदोलन में एक की मौत भी हुई थी। इससे पूर्व के आंदोलनों में तीन लोगों की मौत हुई थी।

हर आंदोलन की शुरुआत मय्यड़ ट्रैक से
12 फरवरी 2016 को जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष हवा सिंह सांगवान ने मय्यड़ रेलवे ट्रैक पर डेरा डाल दिया था। हवा सिंह सांगवान गुट ने तीन दिन बाद ट्रैक खाली किया तो 17 फरवरी को यशपाल मलिक गुट के लोगों ने इस ट्रैक पर कब्जा कर लिया था। यहां से ही पूरे प्रदेश में आरक्षण आंदोलन की चिंगारी फैली। इससे पहले 2010, 2011 तथा 2012 में भी आंदोलन यहीं से भड़का था।
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