हिसार। वर्तमान में उद्योग के लिए भी सततता, प्रबंधन व नवाचार युक्त तकनीक में एकरूपता स्थापित करना एक बड़ी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में उद्योगों एवं विश्वविद्यालयों को मिलकर इन चुनौतियों से उभरी ज्वलंत समस्याओं के समाधान पर शोध करने की आवश्यकता है। विद्यार्थियों को मल्टी टास्किंग नहीं करनी चाहिए। वे स्वयं को समय दें और किसी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में कोई जल्दबाजी न करें। ये बातें जीजेयू में आयोजित कॉन्फ्रेंस में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे जिंदल स्टेनलेस लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष वीके बिंदलिश ने कही।
गुरु जम्भेश्वर विज्ञान विश्वविद्यालय (जीजेयू) के हरियाणा स्कूल ऑफ बिजनेस (एचएसबी) की ’सततता, तकनीकी उद्यमियता और प्रबंधन (स्टेम-2024)’ विषय पर चल रही दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस शुक्रवार को सम्पन्न हो गई है। समारोह की अध्यक्ष्ता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने की। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. विनोद छोकर विशिष्ठ अतिथि थे। एचएसबी के निदेशक प्रो. विनोद कुमार बिश्नोई व एचएसबी के अधिष्ठाता प्रो. कर्मपाल नरवाल मंच पर उपस्थित रहे। इस कॉन्फ्रेंस को भारत तथा दुनिया के कई देशों के 50 से अधिक विषय विशेषज्ञों ने ऑफलाइन तथा ऑफलाइन प्रतिभागियों को संबोधित किया। कॉन्फ्रेंस में न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया, कनाडा, पोलैंड, नाइजीरिया, बंगलादेश, आदि देशों के 50 से अधिक प्रतिभागियों सहित देश व विदेशों से 400 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने एचएसबी की पूरी टीम को कॉन्फ्रेंस के आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि तात्कालिक व सरदर्धित विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा की गई यह चर्चा जहां देश व समाज के लिए सार्थक साबित होगी वहीं नीति निर्माताओं के लिए भी सततता प्रबंधन के लिए नए आयाम प्रदान करेगी।
विशिष्ट अतिथि कुलसचिव प्रो. विनोद छोकर ने इस आयोजन के लिए आयोजन मंडल की सराहना की तथा आह्वान किया कि सभी युवा शोधार्थी अपने-अपने शोधन के क्षेत्र में सततता की सार्थकता को साकार करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व कटिबद्धता परिलक्षित करें। निदेशक प्रो. विनोद कुमार बिश्नोई ने अपने धन्यवाद सम्बोधन में कहा कि स्टेम 2024 एचएसबी की सततता, तकनीकी उद्यमियता तथा प्रबंधन के क्षेत्र में अति उपयोगी सिद्ध होगी।