हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के एक लघु शोध की रिपोर्ट के अनुसार तकरीबन 2.7 एकड़ में खेती करने वाले किसान की आय मनरेगा मजदूर की दिहाड़ी से भी कम है। किसान अपनी खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं। उससे भी किसानों को कुछ आय हो रही है। इसके बावजूद किसान लगातार घाटे में जा रहे हैं। किसान परिवार के चार लोगों को रोजाना 501 रुपये की बचत होती है। हर एक व्यक्ति की प्रति दिन की बचत 125 रुपये बनती है। जबकि मनरेगा मजदूर की एक दिन की दिहाड़ी 357 रुपये है।
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की पत्रिका खेती में मार्च फरवरी 2024 के अंक में कृषि अर्थ शास्त्र विभाग के विनय महला का आलेख प्रकाशित किया गया है। जो उनके 2022-23 में ग्रामीण क्षेत्र में किए गए लघु शोध पर आधारित है। हरियाणा चार जिलों में यह शोध किया गया। जिसमें हर एक परिवार में औसतन 5 से 8 सदस्य थे। जिसमें औसतन चार सदस्य खेती बाड़ी में योगदान करते हैं। अधिकतर परिवारों के पास औसतन दो दुधारू पशु हैं। इन परिवारों के पास औसतन 2.7 एकड़ जमीन है।
सर्वे में शामिल किसान गेंहू, धान, कपास, सरसों, गन्ना, बरसीम, ज्वार की खेती करते हैं। शोध में किसान परिवारों की आय- व्यय का गहराई से अध्ययन किया गया। किसान को अगर पूरी पैदावार हो और पूरे दाम पर वह बिके पर तो उसे 2.7 एकड़ जमीन से साल भर में औसतन 1 लाख 83 हजार रुपये की आस होती है। इस आय में परिवार के चार लोगों की पूरे साल की मेहनत-मजदूरी शामिल है। अगर इसमें प्रति दिन प्रति व्यक्ति की आय निकालें तो यह 125 रुपये भी कम बनती है। आय-व्यय के बीच अंतर को दूर करने के लिए किसान कर्ज की ओर बढ़ रहे हैं। किसानों को कर्ज से बचाने के लिए इसमें हस्तक्षेप की जरूरत है।
सालाना
आय का आंकड़ा
किसान की खेती से आय :183000
डेयरी से आय : 65206
अन्य संसाधन से आय :110250
सभी स्रोत से कुल आय : 358456
किसान का कुल खर्च
खाद्य वस्तुएं : 73185
गैर खाद्य, कपड़े आदि : 140849
कृषि व डेयरी पर खर्च : 165798
कुल खर्च : 379832
खाने पर 19 फीसदी, घरेलू उत्पादों की जरूरत पर 37 प्रतिशत खर्च
किसान का सबसे अधिक 37 प्रतिशत पैसा गैर खाद्य सामग्री घरेलू उपयोग के सामान में खर्च हो रहा है। जिसमें परिवार के लिए कपड़े, जूते,शिक्षा, स्वास्थ्य, वाहन, यात्रा, एलपीजी, बिजली बिल भुगतान, इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण खरीद- रख रखाव, घर की मरम्मत, सामाजिक समारोह में खर्च होता है। किसान परिवार खाने पर करीब 19.3 प्रतिशत खर्च कर रहा है। इसमें अनाज, दाल, अंडा, दूध, खाद्य तेल, सब्जियां, फल, मसाले, पेय पदार्थ आदि शामिल हैं।
लगातार बढ़ रही चुनौती
किसानों के सामने महंगाई के चलते लगातार चुनाैती बढ़ रही है। इसमें कृत्रिम खाद, डीजल, बीज, कीटनाशक, खेती में प्रयोग होने वाले उपकरण लगातार महंगे हो रहे हैं। कृत्रिम खाद के रेट नहीं बढ़ाए लेकिन उसमें 50 किलोग्राम का बैग उसी रेट में 40 किलोग्राम कर दिया गया है। इस तरह से खाद महंगा हो गया है। जिसके चलते किसानों का इनपुट कास्ट लगातार बढ़ रहा है। जिसके चलते किसान का नुकसान का दायरा भी बढ़ रहा है।
किसानों की आय बढ़ाने को लेकर तमाम तरह से दावे किए जाते हैं। एचएयू की पत्रिका में प्रकाशित लेख से साबित होता है कि किसानों की स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। किसानों को एमएसपी देकर कुछ हद तक राहत दी जा सकती है। सरकार सबसे पहले सभी फसलों की पूरी खरीद एमएसपी पर खरीदना सुनिश्चित करे। किसानों को पूरा नहरी पानी, समय पर खाद, बीज उपलब्ध कराए। - दिलबाग हुड्डा, महासचिव, भारतीय किसान यूनियन