हिसार। विश्व धरोहरों में शामिल राखीगढ़ की साइट पर निर्माणाधीन म्यूजियम का इंटीरियर डिजाइन हड़प्पा कालीन सभ्यता के अनुरूप किया जाएगा। चूंकि ऐसा लुक देने वाली टाइलें बाजार में उपलब्ध नहीं है तो इन्हें विशेष ऑर्डर पर बनवाया जाएगा। इसके लिए बीएंडआर ने विभिन्न एजेंसियों से इस डिजाइन की टाइलों के सैंपल मांगे हैं। उधर बीएंडआर की तरफ से रिवाइज एस्टीमेट तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों की मानें तो अगले 14 दिनों में एस्टीमेट तैयार कर भेज दिए जाएंगे।
बता दें कि हड़प्पा कालीन सभ्यता की बड़ी साइटों में शुमार राखीगढ़ की साइट पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का म्यूजियम बनाया जा रहा है। म्यूजियम के अलावा यहां कैफे, रेस्ट हाउस व हॉस्टल का निर्माण भी किया जाना है। वर्ष 2018 में इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ था। इसके लिए प्रदेश सरकार ने करीब 23 करोड़ का बजट उपलब्ध करवाया था। अब पूरा बजट खर्च हो चुका है। बजट के अभाव में पिछले करीब छह माह से काम बंद भी पड़ा है।
पिछले माह हुई थी सचिव स्तर की बैठक, काम जल्द शुरू करने के दिए थे आदेश
पिछले वर्ष दिसंबर में इस प्रोजेक्ट को सचिव स्तर की बैठक हुई थी। बैठक में प्रोजेक्ट से संबंधित इश्यू का जल्द समाधान करने व काम शुरू करने के आदेश दिए गए थे। अधिकारियों की मानें तो प्रोजेक्ट का आर्किटेक्ट म्यूजियम के इंटीरियर लुक को हड़प्पा कालीन सभ्यता के समय के अनुरूप देना चाहता है, जिस पर काफी खर्च आने का अनुमान है। इसके अलावा अभी पार्किंग बनाने को लेकर भी फैसला नहीं हुआ है कि पार्किंग कहां व कितने एरिया में बनानी है। अधिकारियों के अनुसार अब लाइटिंग व फिनिशिंग का काम बाकी है, जिस पर करीब 50 करोड़ रुपये का खर्च आना अनुमानित है।
हॉट लाइन से भी जोड़ा जाएगा म्यूजियम
उधर, म्यूजियम को हॉट लाइन से भी जोड़ने की तैयारी है ताकि म्यूजियम को 24 घंटे बिजली मिल सके। इसे लेकर बीएंडआर ने बिजली निगम को एस्टीमेट तैयार करने को कहा है।
साइट से निकली वस्तुओं को रखा जाएगा म्यूजियम में
इस म्यूजियम में राखी गढ़ी खुदाई के दौरान मिले मानव कंकाल, पुराने समय के आभूषण, सोने के मनके, मिट्टी की चूड़ियां, मनकों की माला, फियांस की चूड़ियां, माथे की बिंदी, सिंदूर दानी, अंगूठी, कानों की बालियां मिट्टी के बर्तन, पत्थर के मनके, हाथी के दांत, उस समय के औजार आदि को म्यूजियम में रखा जाएगा। इन्हें देखने के लिए सिर्फ देश भर से नहीं, बल्कि विदेशों से भी सैलानी आएंगे।
लाइटिंग व डिजाइनिंग का एस्टीमेट तैयार किया जा रहा है। अगले 14 दिनों में एस्टीमेट तैयार कर लिए जाएंगे। बचे हुए काम में कम से सात से आठ माह का समय लगेगा। - रण सिंह, एसडीओ, बीएंडआर