खेत में कीटों का सर्वे करने के लिए रेंडम तरीके से दस पौधे चुनें। हर पौधे से तीन पत्तों का चुनाव करें। इन पत्तों पर मौजूद शाकाहारी व मांसाहारी कीट दोनों की गिनती करें। इस प्रकार उस खेत में प्रति पत्ता कीटों की संख्या का पता लग जाएगा। वैज्ञानिकों ने सभी शाकाहारी कीटों का आर्थिक नुकसान का कगार निर्धारित किया हुआ है। जैसे की सफेद मक्खी प्रति पत्ता 6 से 8, हर तैला प्रति पत्ता 2, चूरड़ा प्रति पत्ता 10, माइट प्रति पत्ता 20 हो तो इस स्तर तक फसल को आर्थिक नुकसान से कम की श्रेणी में माना जाएगा। किसान हर सप्ताह जाकर अपने खेतों में इस तरह से सर्वे करते रहें।
मैनेज संस्था की हैदराबाद व लखनऊ की टीम ने हिमाचल प्रदेश के 22 ब्लाक में सर्वे किया। इसमें पाया कि कीटनाशकों का स्प्रे करने वाले 16 प्रतिशत किसानों को कैंसर हो जाता है। किसानों को एक एकड़ में कीटनाशक का स्प्रे करने पर 3 हजार रुपये खर्च हो जाता है। स्प्रे से इस खेत के उत्पाद उपयोग करने वाले सभी लोगों के अलावा आसपास के लोगाें को भी कैंसर का खतरा बनता है। कीटनाशक हवा, पानी, पशु चारे के जरिए मानव जीवन तक कैंसर पहुंचाते हैं।
डॉ. बलजीत भ्याण ने बताया कि किसानों की मदद से किए सर्वे में यह पाया कि जिन किसानों ने कीटनाशक का प्रयोग नहीं किया वहां पर गुलाबी सुंडी का नुकसान अन्य क्षेत्र की अपेक्षा काफी कम है। वहीं, जिन्होंने ज्यादा कीटनाशक का प्रयोग किया वहां इस साल भी नुकसान ज्यादा है। उन्होंने कहा कि कोई भी कीटनाशक गुलाबी सुंडी को नियंत्रित नहीं कर पाता। ऐसे में गुलाबी सुंडी के नाम पर हजारों रुपये स्प्रे पर बर्बाद करने का कोई फायदा नहीं है। इस अभियान का मकसद किसानों का कीटों के प्रति भय व भ्रम हो गया था उसे दूर कर किसानों को कीटों की पहचान कराना है।
पूर्व जिला उद्यान अधिकारी डॉ. बलजीत भ्याण ने कहा कि किसानों को फसल में पौधों को मजबूत करने के लिए पांच से छह बार छिड़काव करना चाहिए। जिसमें 2.5 किलो यूरिया, 2.5 किलो डीएपी, आधा किलो जिंक 21 प्रतिशत वाला को 100 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इस छिड़काव से पौधे को मजबूती मिलेगी।