हिसार। विधानसभा में 20 फरवरी से बजट सत्र शुरू हो रहा है। इस बार बजट से प्रदेश के अन्नदाता को काफी उम्मीदें हैं। किसानों की मानें तो अगर सरकार खेती को फायदे का सौदा बनाना चाहती है तो किसानों की फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाए। वहीं कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक कृषि क्षेत्र में अनुसंधान पर बजट बढ़ाया जाए।
सरकार सुनिश्चित करे कि एमएसपी पर फसलों की खरीद हो। सभी फसलों का बीमा सरकारी एजेंसी के माध्यम से किया जाए और इसके समय पर भुगतान की व्यवस्था की जाए। मुआवजा समय पर वितरित किया जाए। कपास की फसलों पर आ रहीं बीमारियों को लेकर अनुसंधान किया जाए। खेती को मुनाफे का सौदा बनाने के लिए ज्यादा से ज्यादा अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित किया जाए। भावांतर भरपाई योजना का जमीनी स्तर पर फायदा नहीं मिल रहा है, उसे सही ढंग से लागू किया जाए।
पूर्व उद्यान अधिकारी डॉ. बलजीत भ्याण
जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार को अनुदान की व्यवस्था करनी चाहिए। जैविक फसलों के प्रमाणीकरण की व्यवस्था की जाए। मंडियों की हालत में सुधार किया जाए। किसानों को एमएसपी के अलावा बोनस भी दिया जाए। नहरी पानी की समुचित व्यवस्था की जाए। सूक्ष्म सिंचाई व्यवस्था पर सौ प्रतिशत अनुदान दिया जाए।
सुजान सिंह, किसान
खाद की सब्सिडी को कम न किया जाए। किसान सम्मान निधि योजना में प्रदेश सरकार भी योगदान हो। कई प्रदेशों में ऐसा प्रावधान किया जा चुका है। छोटे किसानों को प्राथमिकता दी जाए। रबी फसल की बिजाई के समय किसानों को खाद-बीज के लिए अतिरिक्त पैसा उपलब्ध करवाया जाए। पशुपालन, बागवानी, डेयरी पर भी ध्यान केंद्रित किया जाए। इसमें नई योजनाएं लाई जाएं ताकि किसान प्रसंस्करण में भी आ सके। बागवानी में भी एमएसपी लागू किया जाए।
- डॉ. केएस खोखर, पूर्व कुलपति, एचएयू
खेती पर बजट बढ़ाया जाए। पिछले वर्ष के मुकाबले इसमें डेढ़ गुणा की बढ़ोतरी की जाए। छोटे किसानों का बजट माफ किया जाए। किसानों को एमएसपी दिया जाए, जो फसल की लागत कम से कम डेढ़ गुणा हो।
- श्रद्धानंद राजली, किसान