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हाउस की बैठक में 26 बेनाम कॉलोनियों को वैध करने का रखा प्रस्ताव, पार्षद बोले-एजेंडा पास किया तो जनता जूतों की माला पहनाएगी

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नगर निगम की हाउस की विशेष बैठक में मौजूद मेयर, निगमायुक्त, पार्षद व अन्य अधिकारी। - फोटो : Hisar
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हिसार। नगर निगम कार्यालय में वीरवार दोपहरबाद करीब 3 बजे 26 कॉलोनियों को वैध करने के प्रस्ताव को पास करने के लिए बुलाई गई बैठक में हंगामा हुआ। पार्षदों ने बेनाम कॉलोनियों को वैध करने के प्रस्ताव का विरोध किया और कहा अगर उन्होंने इस प्रस्ताव को पास किया तो वार्ड की जनता हमें जूतों की माला पहनाएगी।
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बैठक में पार्षदों ने धांधली के आरोप लगाते हुए कहा कि सर्वे के बाद फाइनल सूची में ऐसी कॉलोनियों को भी शामिल किया गया है, जहां एक भी मकान नहीं है। यही नहीं इसमें चहेतों को फायदा पहुंचाया गया है। सर्वे के दौरान डीटीपी व नगर निगम दोनों ने ही पार्षदों को साथ में नहीं लिया। दो घंटे तक चली बैठक को मेयर ने यह कहते हुए समाप्त कर दिया कि पहले अधिकारी पार्षदों के साथ सर्वे का रिकॉर्ड साझा करें, उसके बाद दोबारा बैठक बुलाई जाएगी।
बता दें कि जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) ने अवैध कॉलोनियों को लेकर जिले में ड्रोन सर्वे किया था। इसके बाद इन कॉलोनियों के नक्शे बनाकर मुख्यालय भेज दिए थे। वहां से कुछ कॉलोनियों के नक्शे नगर निगम को भेजे गए थे। निगम की तरफ से कॉलोनियों की फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद रिपोर्ट बनाकर मुख्यालय भेजी जानी है। मगर पहले इन कॉलोनियों को वैध करने का प्रस्ताव को हाउस से पास करवाना है। इसी को लेकर निगम कार्यालय में हाउस की विशेष बैठक बुलाई गई थी।
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बीआई को बैठाया, बोले-जो बता रहे हो वह समझ में नहीं आ रहा
मेयर गौतम सरदाना की अध्यक्षता में दोपहर बाद 3 बजे बैठक शुरू हुई। बैठक के शुरू होने के साथ बीआई सुमित ढांडा ने हाउस को सर्वे के बारे में बताना शुरू किया। इस पर मेयर ने उन्हें रोका और पार्षदों से पूछा कि क्या आपको कुछ समय में आ रहा है तो पार्षदों ने मना कर दिया। इसके बाद बीआई को बैठा दिया गया। मेयर ने डीटीपी मोहन सिंह से कहा कि आपको इसी अच्छे से जानकारी होगी। आप ही इस बारे में पूरे सदन को बताएं।
पार्षद बोले-हमें सर्वे में नहीं लिया साथ
डीटीपी मोहन ने सर्वे की रिपोर्ट के बारे में बताना शुरू किया। इसी बीच पार्षदों ने सर्वे में मिली कॉलोनियों की सूची मांगी तो उन्होंने कहा कि अभी सूची उनके पास नहीं है। इस पर पार्षदों ने कहा कि सर्वे के दौरान अधिकारियों ने पार्षदों को साथ नहीं लिया, जबकि इससे पहले जब कभी सर्वे हुए हैं तो हमेशा पार्षदों को साथ लिया जाता रहा है।
जिन कॉलोनियों का प्रस्ताव पास करना है, उनके नाम तक पता नहीं
पार्षदों ने कहा कि जिन 26 कॉलोनियों को वैध करने का प्रस्ताव रखा गया है, वे सभी बेनाम हैं। हमें उनके नाम तक नहीं मालूम। जिन 26 कॉलोनियों की सूची हमें दी गई है, उनके सिर्फ खसरा नंबर व एरिया का जिक्र है। अब हमें खसरा नंबर पर कैसे पता लगेगा कि यह कौन सी कॉलोनी है। पार्षदों ने कहा कि उनके वर्तमान कार्यकाल में हुईं सदन की बैठकों में अवैध कॉलोनियों को वैध करने के प्रस्ताव पास किए गए थे, लेकिन इस सूची में उन कॉलोनियों के नाम भी नजर नहीं आ रहे। पार्षद कविता केडिया ने कहा कि मैंने अपने कार्यकाल की पहली हाउस की बैठक में विकास नगर को वैध करने का प्रस्ताव रखा था, अगर वह इस सूची में नहीं है तो मैं इस बैठक का बहिष्कार करती हूं।
यह आखिरी लिस्ट नहीं, अभी और आएंगी : निगमायुक्त
पार्षदों को विरोध देखकर निगमायुक्त प्रदीप दहिया बार-बार पार्षदों से यह कहते रहे कि अभी कॉलोनियों की और लिस्ट भी आएंगी। यह आखिरी लिस्ट नहीं है। आप इसका विरोध न करें। सभी पार्षदों के सवालों के जवाब दिए जाएंगे। आपसे अपील है कि इन 26 कॉलोनियों को न रोका जाए। इस पर पार्षदों ने कहा कि आप अपना फर्ज निभाओ, हम हमारा फर्ज निभाते हैं और हमें माफ कर दो। कुछ पार्षद बोले कि अगर अब ये प्रस्ताव पास किया जाता है तो 8 साल बाद तक भी नंबर नहीं आएगा। एक पार्षद ने कहा कि शहरी निकाय मंत्री हमारे शहर के हैं और हमारी ही कॉलोनियां रह गईं। पार्षद अनिल जैन ने कहा कि इस सूची में तो तीन कॉलोनियां ऐसी भी हैं, जो सरकारी जमीन पर बसी हैं।
कविता केडिया व प्रीतम सैनी में हुई बहसबाजी
बैठक के दौरान पार्षद कविता केडिया व प्रीतम सैनी में बहसबाजी हो गई। सदन में प्रीतम सैनी बोलने लगे तो कविता केडिया ने उन्हें बोलने से रोकते हुए कहा कि यहां महिलाओं को नहीं बोलेने दिया जा रहा है। इसी बात को लेकर दोनों में गहमागहमी हो गई। इस पर कविता केडिया एजेंडे की कॉपी फाड़ते हुए व कुर्सी पटककर बाहर चली गई। इसके बाद अन्य पार्षद उन्हें मनाकर अंदर लेकर आए।
डीटीपी पर लगी आरोपों की झड़ी
बैठक ने पार्षदों ने डीटीपी पर आरोपों झड़ी लगा दी। पार्षद भूप सिंह ने कहा कि सबसे ज्यादा अवैध कॉलोनियां मेरे वार्ड में है। डीटीपी ने कहा कि यह सर्वे मेरे यहां आने से पहले हुआ है तो भूप सिंह बोले कि पहले वाला अधिकारी पैसे कमाकर चला गया। पार्षद सतीश सुरलिया ने कहा कि चहेतों के लिए काम करना छोड़ दो। सरकार को बदनाम मत करो। पार्षद की इस बात पर मेयर व निगमायुक्त ने आपत्ति जताई तो पार्षद ने कहा कि मेरा इशारा व्यवस्था की तरफ है न कि अधिकारी की तरफ।
7 एकड़ में बसी सैनिक विहार कॉलोनी को सर्वे रिपोर्ट में 11 एकड़ में दिखाया, भ्रष्टाचार की आ रही बू
पार्षद राजपाल मांडू ने कहा कि मेरे वार्ड की सैनिक विहार कॉलोनी 7 एकड़ में बसी हुई है, जिसकी जमाबंदी भी मेरे पास है। मगर सर्वे रिपोर्ट में कॉलोनी को 11 एकड़ में दर्शाया गया है। साथ ही वर्ष 2016 में कॉलोनी का विकसित एरिया 43 प्रतिशत था, जबकि अब इसे 33 प्रतिशत दिखा गया है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में इस कॉलोनी का 75 प्रतिशत एरिया विकसित है। अधिकारियों ने जो 3 एकड़ का एरिया इसमें और जोड़ा है, वहां एक भी मकान नहीं बना हुआ। यही नहीं वहां का कॉलोनाइजर 40 हजार रुपये प्रति गज के हिसाब से जमीन बेच रहा है। इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार की बू आ रही है। इस मामले की जांच की जानी चाहिए। पार्षद मनोहर लाल ने भी इस मामले की जांच की मांग उठाई।
डीटीपी से 54 कॉलोनियां की मांगी सूची, ज्यादातर नेताओं की मिली
पार्षदों ने डीटीपी से सर्वे के दौरान शहर में मिली कॉलोनियों की सूची मांगी। इस पर डीटीपी ने अपने कार्यालय से सूची मंगवाई। सूची देखकर कुछ पार्षद बोले कि इनमें तो ज्यादातर कॉलोनियां नेताओं की हैं। इसके अलावा गंगवा, बीड़ व कैमरी की ऐसी कॉलोनियों को शामिल किया गया है, जहां एक भी रिहायश नहीं है।
बैठक में संयुक्त आयुक्त बेलिना, उपनिगम आयुक्त वीरेंद्र सहारण, सीनियर डिप्टी मेयर अनिल सैनी, डिप्टी मेयर जयवीर गुर्जर, पार्षद अनिल जैन, कविता केडिया, पिंकी नरेन्द्र शर्मा, सरोज बाला, प्रीतम सैनी, जगमोहन मित्तल, मनोहर लाल, उमेद खन्ना, भूप सिंह रोहिल्ला, जयप्रकाश, डॉ. महेंद्र जुनेजा, अमित ग्रोवर, मनोनीत पार्षद राजपाल मांडू, सतीश सुरलिया व कैप्टन नरेंद्र शर्मा, बिल्डिंग इंस्पेक्टर सुमित ढांडा सहित अन्य मौजूद रहे।
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