फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hisar News: स्ट्रोक में हर मिनट कीमती, देरी पड़ सकती है भारी

Thu, 29 Oct 2026 12:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
विज्ञापन
विज्ञापन
हिसार। स्ट्रोक के लक्षणों को समय पर पहचानकर मरीज को अस्पताल पहुंचाना जरूरी है। शुरुआती साढ़े चार घंटे में उपचार मिलने से जान बचाने और स्थायी विकलांगता का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि लक्षणों की जानकारी न होने के कारण कई मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते।
विज्ञापन

स्ट्रोक के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 29 अक्तूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है। यह दुनिया में मृत्यु और विकलांगता के प्रमुख कारणों में शामिल है।
नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक अधिकारी डॉ. प्रभुदयाल ने बताया कि स्ट्रोक के लक्षण पहचानने के लिए एफएएसटी नियम का इस्तेमाल किया जाता है। रक्त का थक्का घोलने वाले इंजेक्शन (इंट्रावेनस थ्रॉम्बोलिसिस) के लिए शुरुआती 4.5 घंटे अहम हैं, जबकि कैथेटर से थक्का निकालने की प्रक्रिया (मेकैनिकल थ्रॉम्बेक्टॉमी) के लिए लगभग छह घंटे की अवधि महत्वपूर्ण मानी जाती है।
विज्ञापन

इन संकेतों को पहचानें
एफ यानी फेस (चेहरे का लटकना): अचानक चेहरा टेढ़ा हो जाए या उसका एक हिस्सा लटकने लगे तो मरीज को मुस्कुराने के लिए कहें। असमान मुस्कान स्ट्रोक का संकेत हो सकती है।
ए यानी आर्म्स (बांहों में कमजोरी): मरीज से दोनों हाथ उठाने को कहें। एक हाथ न उठ पाना या नीचे झुक जाना खतरे का संकेत है।
एस यानी स्पीच (बोलने में कठिनाई): अचानक लड़खड़ाकर बोलना, अस्पष्ट आवाज या बोल न पाना स्ट्रोक का लक्षण हो सकता है।
टी यानी टाइम (तुरंत मदद): इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत एंबुलेंस बुलाकर मरीज को अस्पताल पहुंचाएं।
अन्य लक्षणों में अचानक एक या दोनों आंखों से दिखाई न देना, चलने में कठिनाई, संतुलन बिगड़ना और बिना कारण तेज सिरदर्द होना शामिल हैं।
युवाओं में भी बढ़ रहा खतरा
हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, तनाव, धूम्रपान, नशा, खराब खानपान और अनियमित जीवनशैली के कारण 30 से 40 वर्ष के युवाओं में भी स्ट्रोक के मामले सामने आ रहे हैं। कोरोना महामारी के बाद बढ़ा तनाव भी इसके जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, देश में हर साल स्ट्रोक के 18 लाख से अधिक मामले सामने आते हैं, जिनमें 25 प्रतिशत मरीज युवा हैं और उनकी औसत आयु 35 वर्ष बताई गई है।
लक्षण दिखें तो तुरंत लें मदद
अचानक कम दिखाई देने, हाथ-पैरों में झुनझुनी या कमजोरी और चक्कर आने पर तुरंत चिकित्सकीय मदद लें। पात्र मरीज को समय रहते थक्का घोलने वाला इंजेक्शन देने से लाभ हो सकता है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें