कोरोना के कारण खिलाड़ियों के अभ्यास पर रोक लगी तो मंगाली की बेटियों ने खेत में मोर्चा संभाल लिया है। कई बेटियां अपने घरों में ही फुटबाल खेल रही हैं तो कई घर का खर्चा चलाने के लिए दूसरों के खेतों में काम कर रही हैं। इनमें नेशनल खिलाड़ी सपना, मंजू, ममता, रविना आदि शामिल हैं।
दरअसल, कोरोना वायरस से बचाव को लेकर 14 अप्रैल तक देश लॉकडाउन है। हर कोई अपना बचाव करने के लिए घरों में कैद है, लेकिन इन दिनों मंगाली की बेटियां गांव की ढाणियों के खेतों में काम कर रही हैं। सुबह से शाम तक यहां की बेटियां खेतों में काम करती नजर आती हैं।
अधिकतर बेटियां हैं गरीब परिवार से
मंगाली में 100 से ज्यादा बेटियां फुटबाल खेलती हैं। इनमें से अधिकतर नेशनल स्तर पर देश की झोली में पदक डाल चुकी हैं। वहीं अधिकतर बेटियां भी गरीब परिवार से हैं। ऐसे में घर का खर्चा चलाने के लिए बेटियां दूसरों के खेतों में मजदूरी करती हैं। खासतौर पर गेहूं कटाई के समय बेटियां समय निकालकर खेतों में काम करती हैं।
नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर जीत चुकीं पदक
मंगाली की बेटियों ने खेलों में देश में इतिहास रच दिया है। यहां की बेटियों ने नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर पदक हासिल कर देश का नाम रोशन किया है। वहीं मंगाली की बेटियों की उपलब्धियों को देखते हुए मंगाली के गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल को मॉडल स्पोर्ट्स स्कूल बनाया गया है। अब यहां सरकार की तरफ से खिलाड़ियों को सुविधाएं दी जाएंगी।
वर्जन
स्कूल में फुटबाल का अभ्यास बंद है। मगर कई खिलाड़ी घर पर ही फुटबाल खेल रही हैं तो कई खिलाड़ी खेतों में भी काम कर रही हैं।
- नरेंद्र कुमार, कोच, फुटबाल
सपना।- फोटो : Hisar