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कैसे उभरेगी स्कूल खिलाड़ियो की खेल प्रतिभा, जिले में पीटीआई व डीपीई का भारी टोटा

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हिसार। जिले के सरकारी विद्यालयों में पीटीआई और डीपीई की भारी कमी खल रही है। 50 प्रतिशत से ज्यादा सरकारी विद्यालयों में पीटीआई व डीपीई की कुर्सियां खाली पड़ी हैं। ऐसे में स्कूली विद्यार्थियों की खेल प्रतिभा कैसे उभरेगी, अभिभावकों को यह चिंता सताए जा रही है। विद्यार्थी शारीरिक शिक्षा से वंचित हैं। जिले में कुल 887 सरकारी स्कूल हैं, जिनमें 506 प्राइमरी स्कूल है। इनमें 99 मिडिल स्कूल, पांच कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, 118 हाईस्कूल, 152 सीनियर सेकेंडरी स्कूल व छह आरोही माडल स्कूल शामिल हैं। इनके अलावा 685 प्राइवेट स्कूल है। जिले में कुल 887 सरकारी विद्यालय हैं, जिनमें शारीरिक शिक्षा से जुड़े केवल 275 पद भरे हुए हैं, जिनमें पीटीई, डीपीई व फिजिकल एजुकेशन लेक्चरर शामिल हैं।
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कोरोना महामारी से उबर आए विद्यार्थियों को शारीरिक शिक्षा बेहद जरूरी है। घर पर रहने से बच्चे मानसिक व शारीरिक तनाव में हैं। शारीरिक शिक्षा से बच्चों का मनोबल बढ़ता है। कुछ स्कूलों में प्रशिक्षक हैं, पर अधिकतर स्कूलों में नहीं। उदाहरण के तौर पर स्याड़वा स्कूल में शारीरिक शिक्षा के लिए पीटीआई हैं, पर पीजीटी नहीं है। नंगथला के छठीं से 12वीं तक के स्कूल में पीजीटी है व पीटीआइ व डीपीई नहीं है।
इतने पदों पर कार्यरत हैं शारीरिक शिक्षक
पीटीआइ - 151
डीपीई - 102
पीजीटी - 22
यह है स्थिति
पद - तैनाती - स्कूल - खाली
पीटीआई - 151 - 228 - 77
डीपीई - 102 - 152 - 50
पीजीटी - 22 - 276 - 254
जिले के सरकारी स्कूलों में डीपीई व पीटीआई की काफी पोस्ट खाली हैं, जिसके कारण बच्चों को पढ़ाने में समस्या आ रही है। खाली पड़े पदों को भरना जरूरी है। हमारी सरकार से मांग है कि वैकेंसी निकालकर खाली पदों को भरा जाए।
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कुलदीप नैन, एईओ स्पोर्ट्स, शिक्षा विभाग।
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