हिसार। एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वैक्सीन अभियान की धीमी रफ्तार ने स्वास्थ्य विभाग को चिंता में डाल दिया है। सात माह में निर्धारित लक्ष्य का महज 10 प्रतिशत ही हासिल हो पाया है। अभिभावकों की झिझक टीकाकरण की राह में सबसे बड़ी अड़चन बनी हुई है। अभियान की समय सीमा साल में दूसरी बार बढ़ाकर अब दिसंबर तक कर दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने सर्वाइकल (बच्चेदानी का मुंह) कैंसर की रोकथाम के लिए एचपीवी वैक्सीन अभियान 28 फरवरी को शुरू किया था। इस अभियान के तहत 14 व 15 साल की किशोरियों को यह टीका लगाया जाना है। शुरुआत में 28 मई (90 दिन) में 18 हजार किशोरियों को यह टीका लगाया जाना था लेकिन इस समय सीमा तक लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सका।
इसके बाद समय सीमा को तीन माह बढ़ा दिया गया लेकिन इस समय सीमा में यह लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। अभी तक करीब 1800 किशोरियों को ही यह टीका लगाया गया है।
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महिलाओं में दूसरा सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर
चिकित्सकों के अनुसार बच्चेदानी के मुंह का कैंसर महिलाओं में दूसरा सबसे बड़ी संख्या में पाए जाने वाला कैंसर है। विश्व के 160 देशों में एचपीवी वैक्सीन लगाई जा चुकी है। यह वैक्सीन डब्ल्यूएचओ और आईसीएमआर से प्रमाणित है। निजी अस्पतालों में यह वैक्सीन काफी समय से लगाई जा रही है लेकिन वहां ये वैक्सीन काफी महंगी है जबकि सरकारी अस्पतालों में यह निशुल्क उपलब्ध है।
अभियान में बाधा बन रहीं भ्रांतियां
इस टीकाकरण को लेकर लोगों में काफी भ्रांतियां हैं जो इस अभियान में बाधा बनी हुई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग फील्ड में जाकर लोगों की भ्रांतियों को दूर करने में लगा है। लोगों में भ्रांति हैं कि इस वैक्सीन के लगवाने से भविष्य में फर्टिलिटी संबंधित परेशानी आ सकती है। इसके अलावा वैक्सीन के लगवाने के बाद बुखार आता है। चिकित्सकों के अनुसार, लोगों को बख्या जा रहा है वैक्सीन के लगवाने से फर्टिलिटी संबंधी कोई कठिनाई नहीं आती है। इसमें कोई बुखार भी नहीं आता है।
सिर्फ हिसार में ही नहीं बल्कि सभी जिलों में टीकाकरण का आंकड़ा कम है। हालांकि अब अभिभावक आगे आकर अपनी बेटियों का यह टीका लगवा रहे हैं। विभाग ने लोगों को यह टीका लगवाने के लिए जागरूक कर रहा है। दिसंबर तक टीकाकरण अभियान आगे बढ़ा दिया है।
- डॉ. दीपक चौधरी, नोडल अधिकारी एवं जिला प्रतिरक्षण अधिकारी