हिसार। दादी मुझे कल स्कूल जाना है, इसलिए सुबह जल्दी उठा देना। मैंने अपना बस्ता भी तैयार कर लिया है। दादा-दादी को यह बात कहकर सोई 9 साल की इंदु सरकारी तंत्र और आर्थिक तंगी के चलते मकान की मरम्मत न करा पाने से हुई हादसे से हमेशा के लिए सो गई। वीरवार रात बारिश से ढंढूर गांव में एक मकान गिर गया। इसमें बच्ची और उसकी दादी की मौत हो गई, जबकि बच्ची के दादा के पैर में फेक्चर आया है।
वीरवार रात करीब 12 बजे तक पूरा परिवार आंगन में सोया था। तभी मौसम ने करवट ली और हल्की बूंदाबांदी होने पर परिवार का मुखिया भीम, उसकी पत्नी 40 वर्षीय रानी और गोद ली पोती इंदु उठकर कमरे में जाकर सो गए। भीम का मकान कच्चा और काफी पुराना है। मकान की छत जर्जर हालत में थी। परिवार को कमरे में गए 15 मिनट ही हुए थे कि छत गिर गई। छत के मलबे के नीचे रानी व इंदु दब गई जबकि भीम के ऊपर कड़ियां गिरीं। इस दौरान शोर मचाने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायलों को निकालकर हिसार के नागरिक अस्पताल पहुंचाया। जहां चिकित्सकों ने रानी और इंदु को मृत घोषित कर दिया। हादसे में भीम की एक टांग टूट गई। शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे सदर थाना हिसार पुलिस ने दोनों शवों का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिए। भीम आर्थिक रूप से काफी कमजोर है। मजदूरी करके अपने परिवार का लालन-पालन करता है।
भीम की नहीं थी कोई संतान, पोती इंदु को लिया था गोद
पीड़ित भीम ने बताया कि उसकी कोई संतान नहीं है। उसने अपनी बहन के बेटे चंद्र की बेटी इंदु को सामाजिक तौर पर गोद लिया था। भीम की बहन गुड्डी देवी भी ढंढूर गांव में उनके पड़ोस में ही रहती है। करीब 9 वर्षीय इंदु अब भीम के परिवार के साथ ही रह रही थी। इंदु तीसरी कक्षा में पढ़ती थी।
एसडीएम अश्वीर नैन ने दिया आश्वासन
ढंढूर गांव के पूर्व सरपंच विकास शर्मा ने बताया कि पीड़ित परिवार को जिला प्रशासन की ओर से आर्थिक मुआवजा दिलाया जाएगा। शुक्रवार को हिसार के एसडीएम अश्वीर नैन गांव में मौके पर आए थे। उन्होंने मौके का निरीक्षण कर आश्वासन दिया कि परिवार की सहायता की जाएगी।
अगर मिल जाता सरकारी योजना का लाभ तो नहीं उजड़ता परिवार
मकान मालिक भीम ने बताया कि वह कई सालों से पक्का मकान बनाने के सरकारी योजना के फार्म भर रहा है। लेकिन उसको अभी तक पक्का मकान बनाने संबंधित रुपये मिलने वाली किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाया। भीम ने बताया कि इस प्रकार की योजना का लाभ लेने के लिए वह कई बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट चुका है। उनका मकान कच्चा ही रह गया। हिसार नागरिक अस्पताल में उपचाराधीन भीम ने बताया कि अगर हमारा मकान पक्का होता तो ये दर्दनाक हादसा नहीं होता व हमारा परिवार नहीं उजड़ता।
रानी का फाइल फोटो ।- फोटो : Hisar
ढ़ंढूर गांव में ढही हुई घर की छत, इस कमरे में सोया था परिवार। संवाद- फोटो : Hisar