सोलह दिसंबर 2012 को हुए दिल्ली गैंग रेप के बाद प्रदेश में भी दुराचार के
मामलों में सख्त कानून बनाने और जल्द न्याय की मांग जोर-शोर से उठाई गई थी।
सरकार ने भी खूब घोषणाएं और वादे किए, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि
अभी भी पीड़ित परिवार वादों के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं,
कोर्ट से भी सभी आरोपियों को सजा दिलवाने की जद्दोजहद जारी है।
नौ
सितंबर 2012 को हिसार जिले में एक दलित नाबालिग से कई युवकों ने सामूहिक
दुराचार करके एमएमएस बनाया गया था। एमएमएस देखने के बाद किशोरी के पिता ने
आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने दस दिन बाद इस मामले में केस दर्ज किया था।
वहीं, स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में चार मई को चार दुराचारियों डाबडा गांव
के विकास, राजकुमार, बलजीत और पवन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं,
चार आरोपियों को बरी कर दिया।
अब पीड़ित किशोरी बरी किए गए
आरोपियों को सजा दिलवाने के लिए हाईकोर्ट में जंग लड़ रही है। इसके साथ-साथ
मानसिक, सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी पीड़िता को जूझना पड़ रहा है। इस
वारदात के सदमे से वह अभी उबर नहीं पाई है। वहीं, दो माह पहले उसने कॉलेज
में सीनियर्स द्वारा भी मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए थे और
कॉलेज जाना बंद कर दिया था।
मांगों के पूरा होने का इंतजार
पीड़िता
की मां ने बताया था कि वारदात के बाद सरकार ने परिवार के सदस्य को स्थायी
सरकारी नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन वह अस्थायी नौकरी के सहारे ही
बच्चों को पाल रही है। वहीं, उनके बेटे या बेटी को कोई नौकरी नहीं मिली है।
उन्होंने 25 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी ताकि पिता की मौत के बाद
परिवार गुजर बसर कर सके, लेकिन उन्हें इंदिरा आवास योजना के तहत बेहद कम
सहायता दी गई। अधिवक्ता लाल बहादुर खोवाल ने बताया कि इस मामले में
हाईकोर्ट में सुनवाई 20 जनवरी को होगी।
सोनिया गांधी नहीं आती तो, पता नहीं कब मिलता न्याय
जींद।
बहुचर्चित सच्चाखेड़ा सामूहिक दुराचार मामले में दलित युवती द्वारा
आत्मदाह करने से पीड़ित परिवार लगभग सवा साल बाद ही सदमे से उबर नहीं पाया
है। परिवार का कहना है कि दुराचार के सभी मामलों में न्याय मिलता हुआ दिखना
भी चाहिए। ऐसे मामलों की सुनवाई न्यायालय द्वारा हर रोज की जानी चाहिए। जब
दुराचारियों को जल्द और सख्त सजा मिलेगी तो कोई और ऐसा कुकृत्य करने की
हिम्मत नहीं करेगा। दुराचारियों को जब कानून का भय होगा तो ही दुराचार के
मामलों में कमी आएगी। परिवार ने कहा बेटी तो चली गई, लेकिन उन्हें न्याय
मिला। तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा तभी हो सकी, जब इस मामले की जानकारी
लेने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व सांसदों का एक दल गांव
पहुंचा।
लड़की के पिता ने बताया कि अगर सोनिया गांधी उनके घर नहीं
आती तो यह मामला दब जाता। उन्होंने कहा कि देश प्रदेश में हर रोज दुराचार
की कितनी ही घटनाएं होती हैं, सभी की जानकारी लेने के लिए सोनिया गांधी या
कोई बड़ा आदमी घर नहीं आ सकता है। ऐसे में मामले दबकर रह जाते हैं।
उन्होंने कहा कि दुराचार के काफी मामले ऐसे होते हैं, जिनकी पुलिस रिपोर्ट
दर्ज करने में काफी समय निकाल देती है। रिपोर्ट दर्ज न होने का फायदा आरोपी
को हो जाता है। वे गांव के चौधरियों का दबाव डलवाने लगते हैं। ऐसे मामले
में जो पुलिस कर्मचारी लापरवाही बरतता है, उसके खिलाफ भी केस चलना चाहिए।
दुराचार के आरोपियों को गिरफ्तार करो
भिवानी।
राजीव कालोनी से छात्रा का अपहरण कर दुराचार करने के आरोपियों की
गिरफ्तारी के लिए पीड़िता के परिजनों के साथ विभिन्न संगठनों ने सोमवार को
जिला मुख्यालय पर धरना दिया। संगठनों ने जिला और पुलिस प्रशासन को चेतावनी
देते हुए कहा कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, उनका
अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। धरने में शामिल भवन निर्माण कामगार यूनियन
के जिला अध्यक्ष राममेहर सिंह, ईंट भट्ठा मजदूर यूनियन के अध्यक्ष कामरेड
भीम सिंह, दलबीर सिंह, मांगेराम, जयवीर सिंह, ईश्वर सिंह ने कहा कि पीड़िता
का अपहरण और दुराचार करने वाले खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि पुलिस लाचार बनी
हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन से कई बार शिकायत की जा चुकी
है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।