राखीगढ़ी में दोबारा शुरू हुई खोदाई करते विद्यार्थी व शिक्षक
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नारनौंद। आइकोनिक साइट के रूप में विकसित हो रही राखीगढ़ी की साइट पर एक बार फिर खोदाई शुरू हो गई है। इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण दिल्ली की टीम लगातार खोदाई करने का काम शुरू किया जा चुका है। इस बार खोदाई का काम टीला नंबर एक से शुरू किया गया है। खुदाई के दौरान निकलने वाले अनेक रहस्यों से पर्दा उठेगा। इसमें मिलने वाले अवशेष इतिहास के पन्ने पर दर्ज हो कर नया इतिहास रचाएंगे।
राखीगढ़ी में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण दिल्ली की तरफ से खोदाई का काम शुरू हो चुका है। इस बार टीला नंबर एक पर खोदाई शुरू की गई है। जिस पर चार ट्रेंच बनाए गए हैं। खोदाई के दौरान काफी चौंकाने वाली चीजें मिली हैं। जिनमें पोट्री, मनके, मुस्टिका, पुराने बर्तन, मिट्टी की चूड़ियां, मिट्टी की दीवारें और एक छोटे बच्चे का कंकाल भी मिला है। वही यह भी देखने को मिला है कि यहां पर वो लोग सामान पकाने के लिए इस जगह का प्रयोग करते थे। इसमें एक छोटी भट्ठी भी मिली हैं। खोदाई में कच्ची ईंटों की दीवार भी मिली है। सभी ईंटें अभी तक इस तरह से सुरक्षित है कि मानो उन्हें कुछ साल पहले ही बनाया गया हो। खोदाई की शुरुआत में ही यह सभी चीजें मिलना काफी आश्चर्यजनक है।
करीब 5000 साल पहले द्वषद्वती नदी के किनारे बसे व्यापारिक नगर राखी गढ़ी की पुरावशेषों को शीशे में रखकर हवा और पानी से सुरक्षित करने के साथ पर्यटकों के लिए प्रदर्शित करने की तैयारी है। इनमें तंदूर, मटके, मिट्टी के बर्तन, चूल्हे, ईटें, दीवारें, खिलौने, परिष्कृत भट्ठी शामिल हैं। राखीगढ़ी में चौथी बार खोदाई शुरू हुई है। पुरातत्व विभाग के पास राखीगढ़ी में इस समय 90 एकड़ जमीन है और 9 टीले हैं। टीला नंबर एक के बाद ही बाकी टीलों की खोदाई होगी। इसमें अभी काफी समय लगेगा।
50 के करीब कर्मचारी व छात्र खोदाई के कार्य में लगे हुए हैं। खोदाई में काफी चीजें मिली है। इन पर शोध किया जाएगा कि यह कितनी पुरानी है। - संजय मंजूल, डिप्टी डायरेक्टर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण दिल्ली