वहीं रमेश बैंड एंड हरि सिंह घोड़ी बग्गी वाला के मालिक रमेश का कहना है कि उनके पास आठ घोड़ियां हैं। शादियों का काम बंद होने के कारण परिवार के साथ-साथ घोड़ियों का खर्चा उठाना मुश्किल हो गया है। अप्रैल-मई माह में शादियों की 35 बुकिंग थीं, लेकिन लॉकडाउन लगने के बाद मई में शादियां बंद हो गईं। मेरे पास 20 से ज्यादा कारीगर हैं। सभी घर पर खाली बैठ चुके हैं। ऐसा ही पिछले साल लॉकडाउन में हुआ था। कोरोना महामारी में काम बंद होने के कारण घर का खर्चा चलाने में परेशानी आ रही है। ऐसे में अब क्या करें।
घोड़ियों के खाने का खर्च भी नहीं उठा पा रहे
अशोका बैंड के मालिक नंद किशोर के पास छह घोड़ियां हैं। वे कहते हैं कि शादियों का काम बंद होने से घोड़ियों के खाने का खर्चा नहीं उठा सकता। ऐसे में मजबूरी में मैंने अपनी घोड़ियों को खुली जगह में छोड़ दिया, ताकि वे कुछ खाकर पेट भर सकें। मेरे पास काम करने वाले 15 कारीगर हैं। रोजाना फोन कर खर्चा मांग रहे हैं। मई में 15 से ज्यादा शादियों की बुकिंग थी, लेकिन शादियां बंद होने के कारण घर का गुजारा करना भी मुश्किल हो गया है। यदि बैंडबाजे का सामान बेचने की नौबत आई तो बेचना ही पड़ेगा।