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9 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले में डीएसपी, तत्कालीन थाना प्रभारी कोर्ट में नहीं हुए पेश, अब सुनवाई 15 नवंबर को

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हिसार। शहर थाने में 18 मार्च 2018 को दर्ज 9 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले में बुधवार को जेएमआईसी सोनिया की अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान डीएसपी हेडक्वार्टर अशोक कुमार सहित कई पुलिस कर्मियों को अदालत में पेश होना था, लेकिन कोई भी पेशी पर नहीं आया। अब सुनवाई 15 नवंबर को होगी।
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मामले की जानकारी शिकायतकर्ता अग्रवाल कॉलोनी निवासी विनोद कुमार की पैरवी कर रहे अधिवक्ता विनोद यादव ने दी है। अधिवक्ता ने बताया कि विनोद सहित 175 लोगों से 9 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई थी। रेड स्क्वेयर मार्केट स्थित दी हिसार अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लि. के पूर्व अधिकारी प्रमोद भारद्वाज, प्रमोद भारद्वाज की पत्नी निर्मल, राकेश सिंगल, राकेश सिंघल की पत्नी इंदू सिंघल, जिला टाउन प्लानिंग अधिकारी अनिल जैन, जेबीटी अध्यापक सुरेंद्र, कमल शर्मा, राजेश शर्मा ने मिलकर वर्ष 1997 में हिसार फ्रैंड्स एनएटीसी को-ऑपरेटिव सोसायटी बनाई। सोसायटी रिजर्व बैंक व जिला कलेक्टर ऑफिस हिसार व जिला को-ऑपरेटिव सोसायटी कार्यालय हिसार में पंजीकृत है। अधिवक्ता ने बताया कि बहकावे में आकर करीब 175 लोगों ने करीब 9 करोड़ रुपये उक्त सोसायटी में अपनी एफडीआर एवं सेविंग खाता के रूप में जमा करवा दिए।
सोसायटी के पदाधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों व दोस्तों के नाम खरीद ली थी प्रॉपर्टी
आरोप है कि जब जमाकर्ताओं ने सोसायटी से रुपये निकलवाने चाहे तो पता चला कि सोसायटी के सभी पदाधिकारियों ने करीब 9 करोड़ रुपये अपने व नजदीकी रिश्तेदारों व दोस्तों के नाम प्रॉपर्टी खरीद ली व सोसायटी के दस्तावेजों में झूठा लोन दिखा दिया। जांच में पता चला कि सोसायटी के कैश लैजर एवं नकदी के रूप में न तो 9 करोड़ हैं और न ही सोसायटी के खाते में। आरोप है कि मामले में सहकारी समितियों के अधिकारियों ने जांच के नाम पर खाना पूर्ति की है। मामले के संबंध में शहर थाने में केस दर्ज हुआ। आरोप है कि पुलिस के जांच अधिकारी ने जांच के नाम पर खानापूर्ति की और आरोपियों से मिलकर आरोपियों का अदालत में चुपचाप चालान पेश किया। इसके बारे में शिकायतकर्ता विनोद को जानकारी नहीं दी गई।
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अदालत से अनुमति लिए बिना कुछ आरोपियों को बनाया सरकारी गवाह
आरोप है कि जांच में कमल शर्मा, राजेश शर्मा, अनिल जैन, सुरेंद्र को निर्दोष बता दिया और सरकारी गवाह बना दिया। जबकि गवाह बनाने के लिए अदालत से आज्ञा नहीं ली गई। आरोप है कि कमल शर्मा, राजेश शर्मा, अनिल जैन ने सोसायटी के खाते से कई चेकों द्वारा कई करोड़ों रुपये निकाले। इस जांच में डीएसपी अशोक कुमार एवं तत्कालीन शहर थाना प्रभारी विनोद कुमार ने तीन आरोपियों को निर्दोष करार दे दिया। शिकायतकर्ता ने मामले की शिकायत जिला एसपी को दी। जांच के लिए सात सदस्यों की एसआईटी बनाई गई।
एसआईटी में डीएसपी हेडक्वार्टर अशोक कुमार को प्रमुख बनाया गया। मामले में अदालत की ओर से डीएसपी व तत्कालीन थाना प्रभारी को नोटिस जारी कर तलब किया। बुधवार को डीएसपी व तत्कालीन थाना प्रभारी अदालत में पेश नहीं हो सके। अब अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई में डीएसपी हेडक्वार्टर अशोक कुमार, तत्कालीन शहर थाना प्रभारी विनोद कुमार को व्यक्तिगत तौर पर हाजिर होने, तीन आरोपियों को जांच से निकलने व उचित धाराएं न लगाने के जवाब के लिए तलब किया है।
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