हिसार। बिना लाइसेंस के 13 प्रकार की दवा बेचने के करीब नौ साल पुराने मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश वेद प्रकाश सिरोही की अदालत ने डाया गांव निवासी सतबीर को साढ़े तीन साल कैद व सवा लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में सजा की अवधि छह माह अतिरिक्त बढ़ा दी जाएगी। इस मामले में दवा नियंत्रक अधिकारियों द्वारा चार स्वतंत्र गवाह बनाए गए और चारों गवाह अपनी गवाही से मुकर गए, लेकिन अभियोजन पक्ष ने प्रतिपरीक्षा (क्रॉस एक्जामिनेशन) के दौरान अपना केस की पुष्टि कर दी।
मामले के अनुसार भाटोल जाटान गांव निवासी धर्मबीर ने स्वास्थ्य विभाग को शिकायत दी थी कि डाया गांव निवासी सतबीर दादी गौरी मंदिर परिसर में बिना लाइसेंस के दवा बेचता है। इसकेे बाद 11 दिसंबर, 2012 को वरिष्ठ दवा नियंत्रक अधिकारी रमन श्योराण व दवा नियंत्रक अधिकारी सुरेश कुमार की टीम मौके पर जांच करने के लिए गई। टीम में धर्मबीर के अलावा गांव में स्थित किराना दुकान के स्वामी सुरेश कुमार, मोबाइल शॉप के स्वामी अजीत सिंह व एक अन्य ग्रामीण रमेश को स्वतंत्र गवाह के तौर पर शामिल किया। जांच के दौरान टीम ने सतबीर के कब्जे से कुल 13 प्रकार की एलोपैथी दवा बरामद की। वह दवा बेचने का लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर पाया। इसके बाद 26 मार्च 2013 को राज्य दवा नियंत्रक से अनुमति लेकर 18 जून 2013 को अदालत में शिकायत दायर की। अदालत ने 5 अक्टूबर 2016 को आरोपी सतबीर के खिलाफ ड्रग एवं कॉस्मेटिक एक्ट के तहत चार्ज फ्रेम किए। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने बुधवार को आरोपी को दोषी करार दिया और वीरवार को सजा सुना दी।
ऐसे मुकरे चारों स्वतंत्र गवाह
मामले की सुनवाई के दौरान जब स्वतंत्र गवाह के तौर पर सुरेश कुमार, रमेश कुमार व अजीत कुमार ने गवाही दी तो तीनों ने कहा कि उनको इस मामले की व्यक्तिगत जानकारी नहीं है और जो 13 प्रकार की एलोपैथी दवाइयां बरामद की गई है, वह उनकी उपस्थिति में बरामद नहीं की गई थी। इसी प्रकार धर्मबीर ने कहा कि उसने स्वास्थ्य विभाग को कोई शिकायत नहीं की थी।
प्रतिपरीक्षा में ऐसे साबित किया केस
जब चारों स्वतंत्र गवाह मुकर गए तो अभियोजन पक्ष ने अदालत से गुजारिश की कि इनको होस्टाइल (विरोधी) गवाह घोषित किया जाए। बाद में अदालत ने चारों को होस्टाइल गवाह घोषित किया और फिर अभियोजन पक्ष ने सभी का क्रॉस एग्जामिनेशन किया। इस दौरान सुरेश कुमार, रमेश कुमार, अजीत कुमार ने माना कि दवा दुकान की जांच के दौरान भरे गए निर्धारित फॉर्म पर उनके हस्ताक्षर है लेकिन साथ ही कहा कि यह हस्ताक्षर उन्होंने कोरे कागजों पर किए थे। धर्मबीर ने माना कि शिकायत पर लगा अंगूठे का निशान उसका है लेकिन शिकायत में जो लिखा हुआ है, उसने नहीं लिखा।