संदीप बिश्नोई
हिसार। इंसानों में लगातार फैल रहे कोरोना संक्रमण में पशुओं की क्या भूमिका है और दोनों में मौजूद विभिन्न कोरोना वायरस में किस तरह की समानताएं हैं, इसकी जांच की जाएगी। किस पशु में किस-किस तरह के कोविड वायरस मौजूद हैं और वे इंसानों में मौजूद कोविड वायरस से कैसे मेल खा रहे हैं या कैसे अलग, यह भी अनुसंधान का विषय होगा।
इस संबंध में केंद्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान को एक प्रोजेक्ट मिला है। करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट के तहत देश के विभिन्न अनुसंधान केंद्र मिलकर काम करेंगे। यह प्रोजेक्ट नेशनल एग्रीकल्चर साइंस फंड की तरफ से स्वीकृत किया गया है।
अलग-अलग केंद्रों पर होगी जांच
हिसार स्थित केंद्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बलदेव गुलाटी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत देश के अलग-अलग हिस्सों जैसे करनाल, बरेली, भोपाल आदि में स्थित अनुसंधान केंद्रों में अलग-अलग पशुओं पर काम किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत सर्वे होगा कि कौन से पशु में कौन-कौन से कोविड वायरस होते हैं। इन वायरस की संरचना इंसानों में होने वाले वायरस से कैसे भिन्न है। प्रोजेक्ट में गाय, भैंस, घोड़े सूअर, जंगली जानवर आदि को शामिल किया जाएगा। इसमें पक्षी शामिल नहीं होंगे।
माना जाता है कि कोरोना वायरस पशुओं से मनुष्य में आया
माना जाता है कि कोविड 19 वायरस चमगादड़ से किसी अन्य पशुओं में आया। लगातार चली प्रक्रिया में वायरस में परिवर्तन होते गए और फिर यह मनुष्य में आ गया। ऐसे में यह अनुसंधान का विषय है कि कोविड 19 की उत्पत्ति कहां से हुई। इसी को लेकर दुनिया भर में शोध हो रहे हैं और हमें भी पशुओं में कोविड वायरस पर अध्ययन करने के लिए प्रोजेक्ट मिला है।
- डॉ. बलदेव गुलाटी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, केंद्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार।