राखीगढ़ी के टीले में मिले कंकाल से डीएनए टेस्ट के लिए सैंपल लेती विशेषज्ञों की टीम।
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हरियाणा के हिसार जिले के नारनौंद में आइकोनिक साइट राखीगढ़ी के टीलों में मिले नर कंकालों का अब डीएनए टेस्ट कराया जाएगा। इसके लिए सैंपल लिए गए हैं। डीएनए टेस्ट के लिए नमूनों को लखनऊ (यूपी) के बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट लैब के अलावा कोरिया व अमेरिका के विश्व विद्यालयों को भेजा गया है। नमूनों की रिपोर्ट से पता लगेगा कि कंकाल कितने पुराने हैं। इसके आधार पर टीले की उम्र का भी अनुमान लगाया जा सकता है। साथ ही मानव शरीर की संरचना समेत प्राचीन काल के कई रहस्यों से पर्दा उठेगा।
पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार राखीगढ़ी में पहली बार चार कंकालों के डीएनए की जांच के लिए टीम ने सैंपल लिए हैं। खोदाई में अभी तक 10 कंकाल मिल चुके हैं। इनमें से साइट नंबर सात पर मिले चार कंकालों के सैंपल लेकर डीएनए के लिए भेजे गए हैं। वर्ल्ड हेरिटेज में शुमार आइकोनिक साइट राखीगढ़ी में पिछले करीब दो महीने से चल रही खोदाई में नए रहस्यों से पर्दा उठने लगा है।
अभी तक हुई खोदाई में करीब 10 कंकाल मिल चुके हैं। इतिहासकारों की मानें तो अभी तक राखीगढ़ी को हड़प्पा सभ्यता व संस्कृति का सबसे पुराना स्थल माना गया है। यहां मिले कंकाल के डीएनए की सैंपल रिपोर्ट आने के बाद कई ऐसे रहस्यों से पर्दा उठने की संभावना जताई जा रही है, जिससे इतिहास में काफी बदलाव हो सकता है।
डीएनए सैंपल लेने के लिए विज्ञानी नीरज राय अपनी टीम के साथ पहुंचे और सावधानी पूर्वक व पीपीई किट पहनकर कंकालों के सैंपल लिए। इस दौरान उनके साथ नेशनल मॉन्यूमेंट अथॉरिटी के चेयरमैन तरुण विजय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण दिल्ली के संयुक्त निदेशक संजय मंजुल, रीजनल डायरेक्टर नॉर्थ अरविंद मंजुल रहे।
डीएनए रिपोर्ट से हो सकते हैं बड़े बदलाव
टीम से मिली जानकारी के अनुसार टीला नंबर सात पर हुई खोदाई में मिले कंकालों की हड्डियों से डीएनए के लिए जो सैंपल लिए गए हैं, उसमें खास बात यह है कि यह डीएनए कंकाल की सबसे बड़ी हड्डी में से लिए गए हैं। इनसे पता लगाया जाएगा कि यह कंकाल कितने साल पुराने हैं और कौन से काल के हो सकते हैं। इसके अलावा मृतक की उम्र और मौत के कारणों का भी पता लगाने की कोशिश की जाएगी। इसके अलावा यह भी पता लगाने की कोशिश रहेगी कि यह नर कंकाल भारतीय शैली से कितना मेल खाते हैं।