हिसार। खनन व निर्माण साइट पर काम करने वाले लोगों को सुरक्षा देने और उन्हें हादसों से बचाने के लिए गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय (जीजेयू) के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. नवदीप मोर ने ''वियरेबल डिजास्टर एमरजेंसी कम्युनिकेशन डिवाइस'' बनाई है। यह डिवाइस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इमेज प्रोसेसिंग तकनीक पर काम करती है और अपने आसपास हो रही चीजों पर नजर रखती है। इतना ही नहीं इस डिवाइस में लगे कैमरे काम कर रहे व्यक्तियों की आंखों की गतिविधि और चेहरे के भावों, दिल की धड़कन और शरीर के तापमान को जांच कर उसे कब आराम करना चाहिए इसकी भी जानकारी देती है।
पेंडेंट, बेल्ट या हाथ की घड़ी में लगा सकते हैं डिवाइस
शोधकर्ता डॉ. नवदीप मोर ने बताया कि आपातकालीन परिस्थितियों में निर्माण साइट पर काम करने वाले व्यक्ति इस डिवाइस को पेंडेंट, बेल्ट या हाथ की घड़ी में लगा सकते हैं। यह डिवाइस उनकी सुरक्षा को बढ़ावा देती है। इस डिवाइस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इमेज प्रोसेसिंग तकनीक का प्रयोग हुआ है, जो कि आने वाले खतरे को भांप लेती हैं और काम कर रहे व्यक्ति को अलर्ट कर देती हैं ।
वाई-फाई व ब्लूटुथ से भी जुड़ेगी
यह तकनीक सेंसर के माध्यम से लो-पावर वाइड एरिया नेटवर्क तकनीक के तहत संकेत दे सकती है, जिसे वाई-फाई या ब्लूटुथ के माध्यम से कनेक्ट किया जा सकता है। इस कारण जीपीएस व जीएनएसएस तकनीक के माध्यम से काम करने वाली जगह की सटीक जगह की जानकारी मिल जाती है और हादसा होने पर समय पर मदद पहुंचाई जा सकती है। यह डिवाइस नोटिफिकेशन व अलर्ट भी देती है। डॉ. नवदीप मोर ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई को इस डिवाइस के संबंध में पेटेंट प्रमाण पत्र सौंपा। इसके लिए कुलपति ने बधाई दी और कहा कि जीजेयू लगातार राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। विभागाध्यक्ष प्रो. आशा गुप्ता ने भी डॉ. नवदीप मोर को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।