अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विमल कुमार की अदालत ने सोमवार को हत्या के जुर्म में बरवाला के वार्ड 12 निवासी रामफल को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने शुक्रवार को महिला राजपती को बरी करते हुए उसके पति रामफल को दोषी करार देकर सजा सुनाने बारे फैसला सुरक्षित रख लिया था।
पुलिस ने इस बारे में 7 जून 2012 को केस दर्ज किया था। अदालत में चले अभियोग के अनुसार बरवाला के वार्ड 12 में वारदात वाले दिन राजमिस्त्री बलबीर सिंह की भैंस घर से थोड़ी दूरी पर रामफल के घेर में चली गई थी। बलबीर भैंस लेने गया तो भैंस वहां आने की बात पर उसकी रामफल से कहासुनी हो गई थी। उन दोनों के घर आमने-सामने हैं। वे कहासुनी करते हुए अपने घरों के आगे आ गए थे। बलबीर सिंह ने पुलिस को शिकायत देकर कहा था कि रामफल ने अपनी पत्नी राजपती से कहा था कि बंदूक लेकर आ। रोज का झंझट खत्म कर देता हूं। इतने में राजपती अंदर से बंदूक ले आई थी। इसी बीच बलबीर की पत्नी बिमला अंदर से आकर चौखट में खड़ी हो गई।
तभी रामफल ने बंदूक से बिमला को सीधी गोली मार दी। उसने बलबीर को भी गोली मारनी चाही, लेकिन वह जान बचाने के लिए वहां से भाग निकला। बाद में वे लोग किसी तरह घायल बिमला को एक वाहन में बरवाला के सरकारी अस्पताल में और वहां से उसे हिसार के सरकारी अस्पताल ले गए। यहां उसे रोहतक रेफर कर दिया गया। कुछ घंटे बाद बिमला ने यहां एक निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया था। बरवाला थाना पुलिस ने इस बारे में रामफल और उसकी पत्नी राजपती के खिलाफ हत्या व आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। मुद्दई के अधिवक्ता आरएल बिमल ने बताया कि कोर्ट ने दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई है।