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अस्पताल में रोज आते हैं दस मरीज नशे के, 80 फीसदी युवा

Sun, 26 Jun 2016 01:06 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला , हिसार
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ड्रग्‍स - फोटो : Azeem Ansari
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युवाओं में नशे का खतरनाक क्रेज लगातार बढ़ रहा है। शराब से लेकर गांजा, अफीम, इंजेक्टिव नशा करने वालों के केस लगातार बढ़ रहे हैं। सिविल अस्पताल सहित जिले के अन्य नशा मुक्ति केंद्रों में युवाओं में नशे का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। सिविल अस्पताल में प्रतिदिन आने वाले मरीजों में से 10 से अधिक लोग नशे के आदी हैं। बड़ी बात यह है कि इनमें से अधिकतर की उम्र 17 से 30 वर्ष की है। यहां आने वाले मरीजों में से करीब 80 फीसदी युवा होते हैं।
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स्मैक, शराब और इंजेक्शन की लत-
यहां आने वाले अधिकतर लोग स्मैक, शराब और इंजेक्टिव नशे का सबसे ज्यादा शिकार है। जिले में कुल सात नशा मुक्ति केंद्र हैं। जिनमें नशा मुक्ति के लिए लोगों को लाया जाता है। लगभग इन सभी केंद्रों में युवाओं की तादाद सबसे ज्यादा है। जानकारी के मुताबिक 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोग शराब की लत के शिकार हैं। लेकिन इससे कम उम्र के युवाओं में शराब से भी अधिक खतरनाक स्मैक, अफीम, गांजा, सुल्फा आदि की लत के मामले अधिक आते हैं। 

3 मरीजों से 7 तक पहुंची संख्या-
सिविल अस्पताल में दो साल पहले तक नशे से पीड़ित 3 से 4 व्यक्तियों को ही अस्पताल में दाखिल करना पड़ता था। अब नशे के शिकार 6-7 व्यक्ति हर वक्त अस्पताल में दाखिल मिलते हैं। इनमें  20 से लेकर 35 साल तक के युवा हैं।
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क्या है अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस
प्रत्येक वर्ष 26 जून को अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस मनाया जाता है। नशीली वस्तुओं और पदार्थों के निवारण हेतु 'संयुक्त राष्ट्र महासभा' ने 7 दिसम्बर, 1987  को प्रस्ताव पारित कर हर वर्ष 26 जून को 'अंतर्राष्ट्रीय  नशा व मादक पदार्थ निषेध दिवस' मानाने का निर्णय लिया था। 

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फैशन बनता जा रहा नशा 

नशे का शिकार होता युवा वर्ग मादक पदार्थों के नशे की लत आज के युवाओं में तेजी से फ़ैल रही है। कई  बार फैशन की खातिर दोस्तों के उकसावे पर लिए गए ये मादक पदार्थ अक्सर  जानलेवा होते हैं। गलत संगति के दोस्तों के साथ ही गुटखा, सिगरेट, शराब, गांजा,  भांग, अफीम और धूम्रपान सहित चरस, स्मैक, कोकिन, ब्राउन शुगर जैसे घातक  मादक दवाओं के सेवन की ओर कदम बढ़ जाते हैं। पहले उन्हें मादक  पदार्थ फ्री में उपलब्ध कराकर इसका आदी बनाया जाता है और फिर वे इसके लिए चोरी से लेकर अपराध तक करने को तैयार हो जाते है। 

अभिभावकों की भूमिका महत्वपूर्ण 
नशा मुक्ति के लिये स्वयं व्यक्ति और परिवार जनों की भूमिका ज्यादा  महत्त्वपूर्ण है। अभिभावकों को अक्सर सुझाव दिया जाता है कि वे अपने बच्चों  पर नजर रखें। उनके नए मित्र दिखाई देने, क्षणिक उत्तेजना या चिडचिडापन  होने, जेब खर्च बढने, देर रात्रि घर लौटने, थकावट, बेचैनी,  अर्द्धनिद्राग्रस्त रहने, बोझिल पलकें, आँखों में चमक व चेहरे पर  भावशून्यता, उल्टियां होने, निरोधक शक्ति कम हो जाने के कारण अक्सर बीमार  रहने, परिवार के सदस्यों से दूर-दूर रहने, भूख न लगने आदि लक्षण मिलने पर तुरंत सावधानी के साथ उपचार शुरू करवाएं।
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