हरियाणा के हिसार के बरवाला क्षेत्र में थर्मल प्लांट की राख का उठान का अधिकार पाने के लिए चार दिन से धरना दे रहे गांव खेदड़ के 18 नामजद व अन्य लोगों के खिलाफ गुरुवार को पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। यह मुकदमा थर्मल प्लांट प्रशासन की तरफ से प्लांट इंजीनियर की तहरीर पर दर्ज हुआ है। वहीं ग्रामीण चौथे दिन भी प्लांट के सामने धरना पर बैठे रहे। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक प्लांट से राख उठाने का अधिकार नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।
पिछले दिनों थर्मल पावर प्लांट ने राख उठाने की सामान्य व्यवस्था पर रोक लगा दी थी। इस पर खेदड़ गांव के लोगों ने आपत्ति जताते हुए राख उठाने का अधिकार पूर्ववत रखने की मांग की थी। थर्मल प्लांट प्रशासन ने मांग नहीं मानीं तो ग्रामीणों ने प्लांट के सामने धरना शुरू कर दिया।
गुरुवार को गोशाला संघर्ष कमेटी ने आरोप लगाया है कि मुख्य अभियंता एसके डागर अपनी सेवानिवृत्ति से पहले मनचाही कंपनियों को राख उठान का टेंडर दिलाना चाहते हैं। थर्मल प्रशासन अब तो ऐसे अत्याचार पर उतर आया है कि खेतों की तरफ जो रास्ते हैं वहां गड्ढे खुदवा दिए हैं। धरनारत लोगों का कहना है कि जब थर्मल के पास उठान की कोई व्यवस्था नहीं थी। गोशाला कमेटी ने व्यवस्था संभाली थी।
उधर, थर्मल पावर प्लांट प्रशासन ने आंदोलन के चलते कार्य प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए आंदोलनकारियों के खिलाफ केस दर्ज करा दिया है। प्लांट के इंजीनियर प्रवीन कुमार की शिकायत पर धरना दे रहे गांव खेदड़ के कलीराम, गोशाला प्रधान ब्रह्म प्रकाश, पवन, पूर्व सरपंच शमशेर, दयानंद शर्मा, चांद, सतेंद्र सहारण, ताराचंद नैन, अनिल सहारण, सज्जन सिंह, प्रकाश नंबरदार, जोगीराम सैनी, वजीर सहारण, रामकेश नैन, हरदेव, सतबीर, रामनिवास, सोहनलाल समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
केस दर्ज होने से खत्म नहीं होगा धरना : सहारण
संघर्ष समिति के सदस्य सत्येंद्र सहारण ने बताया कि थर्मल पावर प्लांट प्रशासन चाहे किसी तरह की कोई कार्रवाई कर ले, धरना जारी रहेगा। प्लांट की राख उठाने से जो आय होती है, उससे गगोशाला का खर्च चलता है। इस गोशाला में करीब 1000 गायों का पालन पोषण होता है। आय नहीं होने पर गोशाला की गायों के लिए चारे का प्रबंध करना भी मुश्किल होगा। थर्मल प्लांट के प्रदूषण को हम भुगत रहे हैं। ऐसे में राख उठान की व्यवस्था पूर्व की भांति ही होनी चाहिए।