अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
लुवास के भैंस फार्म में भैंसों की ऊंची बोली लगाने पर दो गुट आपस में भिड़े गए और लुवास प्रबंधन के सामने दोनों पक्षों में जमकर लात-घूसे चले। एक गुट के लोगों ने वहां दो-तीन गोलियां चलाकर दहशत फैला दी। गोली किसी को नहीं लगी, लेकिन मारपीट में भारत नगर के दो बाप-बेटा घायल हो गए। घमासान के कारण प्रबंधन को वहीं बोली रुकवानी पड़ी। सिविल लाइन पुलिस मामले की जांच कर रही है।
लुवास के भैंस फार्म में बुधवार को 61 भैंसों और कटड़े-कटड़ियों की बोली होनी थी। इसके लिए पहले से प्रचार किया गया था। भैंस खरीदने की इच्छुक 142 पार्टियां बोली लगाने पहुंची थीं। लुवास के एलपीएम डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. हरीश गुलाटी की अगुवाई में डॉ. रवि कुमार और सुरेंद्र कुमार, अजय कुमार और गजानंद की टीमें मौके पर मौजूद थीं। शामियाने में कुर्सियों पर बोलीदाता बैठे हुए थे। एक-एक करके भैंस को सामने लाया जा रहा था। 10 बजे बोली की प्रक्रिया शुरू हुई। लुवास प्रबंधन की तरफ से पहली भैंस का सरकारी रेट बताकर बोली शुरू कराई गई। सरकारी रेट बताने पर बोली शुरू हुई तो कमल वगैरहा की दूसरी पार्टी से बहस शुरू हो गई। वहां मौजूद अन्य लोगों ने मामला शांत कराया। तीसरी भैंस की बोली में भी दोनों पक्षों की बहस हुई, लेकिन वहां मौजूद अधिकारियों और बोलीदाताओं ने मामला शांत करा दिया।
बोली ऊपर लगाते ही घमासान, मारपीट और फायरिंग
बाद में 11वीं भैंस की बोली शुरू हुई। प्रबंधन ने भैंस दिखाकर सरकारी बोली 25 हजार रुपये बताकर शुरू कराई। एक पक्ष ने 26 हजार रुपये बोली लगाई। इस पर कमल वगैरहा ने 27 हजार रुपये बोली लगा दी। इस पर वहां घमासान के हालात हो गए। दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई और लोहे के एंगल से कमल और उसके बेटे साहिल पर हमला बोल दिया। इतना ही नहीं हमलावर पक्ष ने दो-तीन गोलियां चलाईं, लेकिन सौभाग्य से गोली किसी को नहीं लगी।
कमल बोला, नीचे बैठने से बची जान, नकदी लूट ले गए
सिविल अस्पताल में उपचाराधीन कमल का आरोप है कि हमलावरों ने उसे मारने की नीयत से तीन गोलियां चलाईं, लेकिन वह जमीन पर बैठने के कारण बच गया। गोलियां मेरे ऊपर से गुजर गई। उसका कहना है कि हमलावर उसकी नकदी भी लूट ले गए। उसके बाद हमलावर बाहर निकलकर एक गाड़ी में फरार हो गए।
घमासान में टूटे कुर्सी-मेज
वहां घमासान के चलते बोलीदाताओं में अफरा-तफरी मच गई। मारपीट के दौरान अन्य बोलीदाता दूर जाकर खड़े हो गए थे, लेकिन गोलियां चलते ही वे दीवारों की आड़ लेते नजर आए। वहां भगदड़ की स्थिति बन गई और कुर्सी-मेज क्षतिग्रस्त हो गए।
प्रबंधन ने की बोली स्थगित
वहां मचे घमासान के बाद लुवास प्रबंधन ने बोली स्थगित कर पुलिस को वारदात की सूचना दी। सिविल लाइन से सब इंस्पेक्टर डोगर सिंह टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। वहां एक कमरे में लुवास के डॉ. हरीश गुलाटी ने पुलिसकर्मियों को वारदात की जानकारी दी।
सुरक्षा के अधूरे थे इंतजाम
लुवास प्रबंधन ने कमजोर सुरक्षा व्यवस्था के बीच बोली शुरू की। बोलीदाताओं का कहना था कि सीसीटीवी बंद पड़े हैं और वहां पुलिस कर्मी नहीं थे। लुवास के तीन-चार सुरक्षाकर्मी जरूर नजर आए, लेकिन बोली को लेकर वे पर्याप्त नहीं थे। घमासान के बाद पुलिसकर्मी काफी संख्या में दिखे।
बोलीदाता बोले, बोली पूरी कराओ
लुवास प्रबंधन के बोली स्थगित करने के बाद काफी बोलीदाताओं ने बोली कराने के लिए डॉ. गुलाटी से बहस की। उनका कहना था कि यूपी, राजस्थान के अलावा रोहतक, दिल्ली, सोनीपत, चुरू, भटिंडा तक के बोलीदाता आए हुए हैं। आखिर हमारा क्या कसूर है। उसके बाद डॉ. गुलाटी वीसी से बात करने की बात कहकर वहां से चले गए।
सुरक्षा व्यवस्था पूरी थी। सीसीटीवी यहां चलते रहे हैं, लेकिन बंदरों की उछलकूद के चलते तार टूटने से सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग बंद हो गई थी।
-डॉ. हरीश गुलाटी, एचओडी लुवास