देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है। संक्रमण के खत्म होने के आसार भी नजर नहीं आ रहे। भविष्य में ऐसी कोई बीमारी न फैले, देश के वैज्ञानिक अब इस रिसर्च में जुट गए हैं। चमगादड़ और अन्य पशुओं में ऐसे कौन-कौन से वायरस हैं, जो इंसानों के लिए खतरा बन सकते हैं, अब इसका अध्ययन होगा।
इस शोध का मकसद कोविड की तरह भविष्य में किसी वायरस के फैलने की कितनी आशंका है, इसका पता लगाना और उसके लिए डाटाबेस तैयार करना है। इसमें बर्ड फ्लू जैसी उन बीमारियों को भी शामिल किया जाएगा, जो पहले ही पशु पक्षियों से इंसानों में हुई हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने हिसार के केंद्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र को यह जिम्मेदारी सौंपी है। वैज्ञानिक हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश आदि प्रदेशों में चमगादड़ और अन्य पशुओं के संबंध में अध्ययन करेंगे।
पूरे देश में कोरोना के मामले खतरनाक तेजी से बढ़ रहे हैं। हैदराबाद में शेरों में भी कोविड वायरस मिलने से संक्रमण का डर बढ़ गया है। इसके बाद से वायरस की संरचना में बदलाव होने की आशंका जताई जा रही है। लगातार हो रहे जलवायु परिवर्तन के चलते पशु-पक्षियों की किसी भी बीमारी का ट्रांसमिशन इंसानों में हो सकता है, विशेषज्ञ ऐसी आशंका के लिए भी पहले से तैयारियां कर रहे हैं।
इंसानों और पशुओं के चिकित्सकों के बीच बढ़ेगा समन्वय
केंद्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. बलदेव गुलाटी ने बताया कि आईसीएमआर की तरफ से उन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई है। पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के चमगादड़ों और पशुओं में ऐसी बीमारियों की पहचान करनी है, जो इंसानों में आ सकती हैं। इनकी पहचान करके पशुओं और इंसानों के चिकित्सकों के बीच समन्वय करना है, ताकि भविष्य में कोई ऐसी जेनेटिक बीमारी आए तो सही वक्त पर सूचनाओं का आदान प्रदान करके बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके।