कोरोना संक्रमण बच्चों में भी तेजी से फैल रहा है। पिछले माह के मुकाबले मई में दोगुना रफ्तार से बच्चों में संक्रमण फैला। हिसार में मई के 17 दिनों में 335 बच्चों के संक्रमित होने के केस आ चुके हैं। अप्रैल में केवल 174 केस मिले थे। मार्च में केवल 8 केस थे। अधिकतर बच्चे स्वस्थ हो रहे हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि अबकी बार बड़े बुजुर्गों और युवाओं में भी संक्रमण बढ़ा है। परिवार के लोगों की लापरवाही के कारण बच्चे भी संक्रमित हो रहे हैं। अभी तक बच्चों को वैक्सीन भी नहीं लग रही है। तीसरी लहर में बच्चों को खतरा अधिक हो सकता है।
शून्य से दस साल तक के बच्चों की बात करें तो अब तक कोरोना संक्रमित 4 बच्चों की मौत हो चुकी है। चिकित्सकों के मुताबिक इन्हीं बच्चों को संक्रमण का अधिक खतरा रहता है। छोटे बच्चे समझाने पर भी पर मास्क का सही उपयोग नहीं कर सकते। बच्चों को घर पर रखना ही बचाव है। दमा, किडनी, कुपोषित या कैंसर से ग्रसित बच्चों को संक्रमित होने का अधिक खतरा है। इसलिए उनको अधिक देखभाल की जरूरत है।
बहुत कम बच्चों को अस्पताल की जरूरत
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजू हुड्डा का कहना है कि रोज ओपीडी में 4 से 5 संदिग्ध लक्षण वाले बच्चे आते हैं। बच्चों की हालत ठीक होने पर हम उनको होम आइसोलेट करते हैं। ऐसे में अभिभावक की भी जिम्मेदारी बढ़ती है कि हर समय बच्चों का खाने-पीने से लेकर उनकी ऑक्सीजन लेवल का ध्यान रखें। बहुत कम बच्चों को अस्पताल में दाखिल करने की जरूरत होती है।
मेडिकल कॉलेज में है कोविड-19 नर्सरी की व्यवस्था
बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि मां चाहे संक्रमित हो, डिलिवरी के बाद बच्चे को मां के पास ही रखना पड़ता है। उस समय मां हमेशा मास्क लगाए रखे। नियमों का पालन करके दूध पिलाए। जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से नवजात बच्चों के इलाज के लिए अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में कोविड-19 नर्सरी की व्यवस्था की है। गंभीर बच्चों को वहीं दाखिल किया जाएगा।
3 मई को मिले थे सबसे अधिक 36 बच्चे संक्रमित
मई में प्रतिदिन औसतन 17 से 18 बच्चे संक्रमित मिल रहे हैं। 3 मई को एक दिन में सबसे अधिक 36 बच्चे संक्रमित मिले थे। अप्रैल माह के अंत के 15 दिनों में ही बच्चों के संक्रमित मिलने के मामले बढ़े थे। अप्रैल के पहले 15 दिन हर रोज 2 से 3 बच्चे भी संक्रमित मिल रहे थे। स्कूल बंद होने से बहुत कम संक्रमित मिल रहे हैं।
यह ध्यान रखें
- बच्चों को पानी एवं तरल पदार्थ अधिक पिलाएं।
- फल-सब्जियां एवं संतुलित भोजन दें।
- जिन बच्चों में खून की कमी या वजन कम है, उनका अधिक ध्यान रखें।
- होम आइसोलेशन में बच्चों का वजन कम हो तो चिकित्सक के पास पहुंचे।