- मेडिकल कॉलेज में जिन मरीजों का आइसोलेशन वार्ड में उपचार चल रहा है, उनमें भी फंगल संक्रमण के लक्षण मिल रहे हैं।
- जो मरीज कोरोना से ठीक हो कर घर जा चुके है और उनमें भी 3 से 4 सप्ताह बाद फंगल संक्रमण के लक्षण आ रहे हैं।
- ऐसे मरीज जिन्होंने अभी तक टेस्ट नहीं करवाया है, उनमें भी यह लक्षण पाए जा रहे हैं। इनका पहले कोरोना टेस्ट किया जाएगा, ताकि पता चले कि कोरोना से आए हैं या नहीं।
फंगल कल्चर टेस्ट से मिलती है जानकारी
विशेषज्ञ के मुताबिक ब्लैक फंगस का पता लगाने के लिए कोविड से अलग केओएच यानी फंगल कल्चर टेस्ट करवाया जाता है। उसी से पता चलता है कि यह फंगल संक्रमण है या नहीं। इसके अलावा मरीज का सीटी स्कैन भी करवा लेते हैं, उससे भी संक्रमण का पता लग जाता है। यह सुविधा मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में उपलब्ध है।
अभी तक ब्लैक फंगस के 17 मरीजों का मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है। मरीजों को स्वस्थ करने के लिए हर तरह का प्रयास किया जा रहा है। - डॉ. गीतिका दुग्गल, डायरेक्टर, अग्रोहा मेडिकल कॉलेज।