दलितों के उत्पीड़न चलते देश भर में मशहूर हो चुके जिले के गांव में भाईचारा स्थापित करने के लिए एससी-एसटी आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह गांव में दोनों पक्षों की पंचायत करने पहुंचे। यहां दोनाें पक्ष एक पंचायत में पहुंच गए, लेकिन एक साथ नहीं बैठे। दीवार के एक ओर दलित रहे दूसरी ओर अन्य जातियों के प्रतिनिधि।
आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह शनिवार को गांव पहुंचे। उन्होंने दोनों पक्षों को पंचायत घर में बुलाया। करीब दो साल बाद दोनों पक्षों के लोग पंचायत घर में पहुंच गए। दलितों ने एक साथ बैठने से इंकार कर दिया। गांव की पंचायत अंदर रही तो दलित पंचायत घर में ही दीवार की दूसरी ओर बैठे रहे। आयोग सदस्य ने बारी-बारी दोनों पक्षों की बात सुनी। दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने का भरसक प्रयास भी किया।
दलितों ने कहा कि उन्हें टिब्बा एरिया में प्लॉट दिए जाएं। वह एरिया गांव से बाहर है, जहां वह खुद को सुरक्षित महसूस करेंगे। दलितों ने कहा कि वहां पर प्लॉट देने के लिए पूर्व सरपंच ने प्रस्ताव भी पारित किया गया था, जिसे बाद में रद कर दिया गया। दलित अपनी मांग को लेकर अड़े रहे।
गांव की पंचायत दलित वर्ग को दूसरी ओर प्लॉट देना चाहती है। पंचायत का तर्क था कि दलितों को गांव से बाहर प्लॉट दे दिए गए तो भाईचारा नहीं रह पाएगा। इस कारण गांव में दलितों की बस्ती के साथ लगते एरिया में ही प्लॉट दिए जाए। ऐसा होने से दलितों को स्कूल, पेयजल, खेल मैदान सहित अन्य सुविधाएं मिल जाएंगी।
करीब डेढ घंटा चली पंचायत में दोनाें पक्ष अपनी अपनी बात पर अड़े रहे, जिसके चलते कोई नतीजा नहीं निकल सका। आयोग सदस्य ईश्वर सिंह ने दोनों पक्षों को दस दिन का समय दिया, जिसमें दोनाें पक्ष के बीच सहमति बनी तो पंचायती फैसला किया जाएगा। सहमति नहीं बनी तो दोनाें पक्षों को आयोग अपने सामने बुलाकर सुनवाई करेगा।
दलितों से बातचीत करते हुए ईश्वर सिंह ने कहा कि हमने तो पूरे मामले के लिए एसआईटी मांगी थी, जिस पर प्रदेश सरकार ने एसआईटी बनाने से इंकार कर दिया। इस बारे में आयोग ने जवाब भी मांगा। सरकार की ओर से जवाब नहीं मिला।
आयोग सदस्य ईश्वर सिंह ने गांव के सरपंच राकेश को नम्रता, भाईचारा, सहनशीलता का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि हमेशा फलदार पेड़ ही झुकते हैं। समय के साथ बदलो, सहनशीलता, सद्भाव, प्रेम से गांव का नाम रोशन करो।
आयोग सदस्य ईश्वर सिंह के साथ उपायुक्त एमएल कौशिक, पुलिस अधीक्षक विकास धनखड़, जिला पंचायत विकास अधिकारी राजेश खोथ, अतिरिक्त उपायुक्त राजनारायण कौशिक, एसडीएम अशोक बंसल, जिला कल्याण अधिकारी सहित अन्य अधिकारी शामिल थे।
ईश्वर सिंह ने दलितों से कहा कि जल्द से जल्द 100-100 गज के प्लॉट ले लो। 15 दिन में आचार संहिता लग जाएगी। उसके बाद अधिकारियों को प्लॉट न देने का बहाना मिल जाएगा। चुनाव के बाद अगली कैसी सरकार आएगी, प्लॉट मिलेगा या नहीं, कौन जानता है। पहले 2008 के आवेदनों के प्लॉट अपने कब्जे में ले लो। इसके बाद आगे की लड़ाई लडे़गे।
ईश्वर सिंह रेस्ट हाउस पहुंचे तो दलित संगठना के प्रतिनिधि अपनी बात रखने के लिए पहुंच गए। यहां उन्होंने संबंधित गांव के लोगों का पक्ष सुनने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि गांव के फैसले रेस्ट हाउस में नहीं गांव की चौपाल में होते हैं। गांव चलो, वहीं पर फैसला करेंगे।
यह है मामला
1. जिले के इस गांव के दलितों के कुछ लोग अंबेडकर की प्रतिमा को तोड़ने, चौक पर कब्जा करने सहित कुछ मुद्दों को लेकर पिछले दो साल से गांव से पलायन कर हिसार लघु सचिवालय परिसर में धरना दे रहे हैं।
2. इसी गांव के कुछ परिवार युवतियों के साथ दुराचार के मामले को लेकर गांव से पलायन किए हुए हैं। दुराचार पीड़िताओं के लिए न्याय मांग रहे यह परिवार पिछले करीब दो माह से दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देकर बैठे हैं।